राब-खीचड़ा प्रमुख
रियासतकाल को याद कर मोहिनी देवी उस दौर को आज से कही अधिक अच्छा बताती है। सौ वर्ष से अधिक आयु पार कर चुकी मोहिनी देवी बताती है कि उस दौर में महिलाओं की अधिक इज्जत थी। महिलाएं घर के कार्यो में ही व्यस्त रहती थी। घटी, सिला लोढी और उंखळी से ही अनाज और मसाले पीसे जाते थे। छाछ, खारी राब, बाजरे व मूंग का खीचड़ा, बाटा, कैर, सांगरी और ग्वरपाठे की सब्जी प्रमुख थी।