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बीकानेर की अनोखी होलीः प्रेम की डोलची में भर-भर कर मारी सतरंगी बौछार

भगवान कृष्ण एवं राधिका ने गोपियों के साथ नृत्य कर एक दूसरे पर पिचकारी से पानी की मार मारी। तत्पश्चात बच्चों से बूढ़ों तक ने सतरंगी डोलची खेल में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया।

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बीकानेर की अनोखी होलीः प्रेम की डोलची में भर-भर कर मारी सतरंगी बौछार

बीकानेर की अनोखी होलीः प्रेम की डोलची में भर-भर कर मारी सतरंगी बौछार

बीकानेर. बारह गुवाड़ चौक में ओझा और छंगाणी जाति के बीच परंपरागत डोलची खेल सोमवार को खेला गया। इस दौरान लोहे के बड़े कडाह व कुंडियों में पानी भरा गया। दोनों जातियों के पुरुषों के बीच डोलची खेल शुरू हुआ। जबरेश्वर महादेव और पूर्व डोलची खिलाडि़यों की पूजा-अर्चना और भगवान कृष्ण की माखन चोर लीला के मंचन के बाद डोलची दोपहर एक बजे के करीब प्रारंभ हुआ। इस दौरान भारी संख्या में लोग इस कार्यक्रम में शामिल हुए। मोहल्ले की पहली मंजिल हो, घरों के आगे दरवाजे हों या तिमंजिला भवन हों, हर मंजिल पर इस परंपरागत खेल को देखने के लिए महिलाएं मुंडेरों पर, बालकनियों में और छतों पर जमी रहीं।

सोमवार को ओझा छंगाणी जाति के लोगों के बीच बारहगुवाड चौक प्रांगण में पानी खेल सतरंगी डोलची का आयोजन हुआ। लोहे के बड़े बड़े कड़ाहों में सात रंगों से रंगीन पानी को डोलची में भर कर एक दूसरे की पीठ पर प्रेम भरी बौछारें कर होली की शुभकामनाऐं दी गई। दशकों पुरानी इस परंपरा का निर्वहन पुजारी बाबा के नेतृत्व में किया गया। डोलची खेलार दिवंगत गुलजी ओझा की स्मृति में आयोजित होली खेल का शुभारंभ भगवानकृष्ण की माखन चोर लीला के प्रदर्शन के साथ हुआ।

भगवान कृष्ण एवं राधिका ने गोपियों के साथ नृत्य कर एक दूसरे पर पिचकारी से पानी की मार मारी। तत्पश्चात बच्चों से बूढ़ों तक ने सतरंगी डोलची खेल में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। कुछ ही देर में मोहल्ले और गलियों की सड़कें सतरंगी रंगों में नजर आने लगी। लोग पानी और रंगों की बौछार में भीगे होली के गीत गाते दिखाई देने लगे। फिजां में गुलाल की महक और रंगों की बौछार उड़ने लगी।

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