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अब नहीं मिलेगी बजरी, प्रदेश के कई जिलों में निर्माण कार्य पर पड़ेगा असर

बीकानेर. घर बनाने या भवन निर्माण के लिए जरूरी निर्माण सामग्री बजरी के लिए अब परेशानी खड़ी होने वाली है। बाजार में ईंट, सीमेंट, सरिये, पीओपी आदि निर्माण सामग्री तो मिल जाएगी लेकिन, मुंह मांगे दाम पर भी बजरी मिलना मुश्किल हो जाएगा। खान एवं भू विभाग विभाग ने बीकानेर में बजरी के रॉयल्टी ठेके को निरस्त कर दिए है।

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Canceled royalty contract for gravel

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बीकानेर. घर बनाने या भवन निर्माण के लिए जरूरी निर्माण सामग्री बजरी के लिए अब परेशानी खड़ी होने वाली है। बाजार में ईंट, सीमेंट, सरिये, पीओपी आदि निर्माण सामग्री तो मिल जाएगी लेकिन, मुंह मांगे दाम पर भी बजरी मिलना मुश्किल हो जाएगा। खान एवं भू विभाग विभाग ने बीकानेर में बजरी के रॉयल्टी ठेके को निरस्त कर दिए है।

अब बजरी का परिवहन और खुदाई पूरी तरह से अवैध मानी जाएगी। बीकानेर के श्रीकोलायत, हाडलां, बज्जू, लूणकरनसर, नोखा तथा आस-पास क्षेत्रों में बजरी का बहुतायत खनन होता है। परन्तु रॉयल्टी शर्तों के उल्लंघन को चलते विभाग ने मैसर्स सांगरियाराय रॉयल्टीज के ठेके को निरस्त कर दिया है। इस कार्रवाई के बाद जिन लोगों के पास पहले से बजरी का स्टॉक पड़ा था, वे भी कई गुणा कीमत वसूलने से नहीं चूकेंगे। पहले जहां बजरी आसानी से १८ रुपए क्विंटल या १९० रुपए टन मिलती थी, वहीं अब स्टॉक में पड़ी बजरी को करीब पांच गुणा अधिक कीमत पर बेची जा रही है।
इसलिए ठेका निरस्त
खान एवं भू विज्ञान विभाग के खनिज अभियंता मनीष वर्मा ने बताया कि रॉयल्टी ठेकेदार नियमों की अवलेहना कर रहा था। जांच दल की ओर से अधिक वसूली से जुड़ी शिकायतों की जांच की तो पुष्टी भी हो गई। रॉयल्टी ठेकेदार की ओर से अनाधिकृत रॉयल्टी की पर्चियां भी जारी करना पकड़ में आया है। इसे भी जांच में शामिल किया गया। वर्मा ने बताया कि सांगरियाराय रॉयल्टीज को एक अप्रेल २०१८ से ३१ मार्च २०२० तक रॉयल्टी नाके लगाने का ठेका दिया, जिसे निरस्त किया गया है।
यहां पड़ेगा असर
बीकानेर में बजरी की रॉयल्टी का ठेका निरस्त होने के बाद बीकानेर सहित श्रीगंगानगर, चूरू, हनुमानगढ़, जोधपुर, बाड़मेर, जालौर, पाली, सिरोही आदि जिलों के खरीददारों को बजरी की आपूर्ति बीकानेर से ही होती है। अब बीकानेर सहित आस-पास के जिलों में बजरी की परेशानी पैदा होगी।
अब आगे क्या होगा
खनिज विभाग के सूत्रों की मानें तो मुख्यालय से आगामी निर्देशों के बाद ही कोई निर्णय लिया जाएगा। फिलहाल इस संबंध में किसी भी सूरत में ढिलाई नहीं बरती जाएगी। उधर बजरी के विक्रेताओं की मानें तो इस संबंध में विभाग को रॉयल्टी ठेका निरस्त करने से पहले बजरी की वैकल्पिक व्यवस्था करनी थी।