सूर्य की उपासना के बाद रात्रि में छठ माता के गीत गाए गए और व्रत कथा सुनी गई। खरना की शाम से 36 घंटे के चल रहे निर्जल व्रत के दौरान छठ मईया और भगवान सूर्य की पूजा-अर्चना चल रही है। महापर्व के चौथे और अंतिम दिन शनिवार सुबह उगते सूर्य को अघ्र्य देकर पूजन किया जाएगा व व्रती अपने व्रत का पारण या परना करेंगे। चतुर्थी को नहाय खाय के साथ शुरू हुए इस महापर्व के तहत पंचमी को खरना हुआ। व्रतियों ने शाम से निर्जल रहकर उपवास शुरू किया। सप्तमी की सुबह सूर्य पूजन के बाद व्रत का पारण या परना होगा। पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड में छठ पूजन लोकपर्व के रूप में आस्था और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। बीकानेर में रह रहे इन प्रदेशों के निवासी छठ पूजा महापर्व धूमधाम के साथ मना रहे है।