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पीबीएम का हाल: स्ट्रेचर पर तय हो रही मरीजों की मंजिलें

भर्ती, ऑपरेशन और जांच अलग-अलग जगह, अव्यवस्था से मरीज और डॉक्टर दोनों हलकान

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पीबीएम अस्पताल स्थित ट्रॉमा सेंटर।

पीबीएम अस्पताल स्थित ट्रॉमा सेंटर।

संभाग के सबसे बड़े पीबीएम अस्पताल का अस्थि रोग विभाग अव्यवस्थाओं की ऐसी तस्वीर पेश कर रहा है, जहां फैक्चर जैसे गंभीर मरीजों को भी राहत के बजाय भटकाव झेलना पड़ रहा है। भर्ती एक भवन में, ऑपरेशन दूसरे में और जांचों के लिए अलग-अलग स्थानों पर दौड़भाग। इस बिखरी व्यवस्था ने मरीजों के साथ-साथ चिकित्सकों को भी परेशानी में डाल दिया है। हालात यह हैं कि स्ट्रेचर पर मरीजों को लंबी दूरी तय कर ट्रॉमा सेंटर तक ले जाना पड़ रहा है। फैक्चर पीडि़त मरीजों को भी नहीं मिल रही राहत आमतौर पर फैक्चर मरीजों को कम हिलाने-डुलाने की सलाह दी जाती है, लेकिन यहां मरीजों और उनके तीमारदारों को बार-बार इधर-उधर जाना पड़ता है। जांचों के लिए अलग भटकाव और भर्ती की अलग प्रक्रिया से एक दिन सिर्फ व्यवस्थाओं में ही निकल जाता है।

भर्ती पीबीएम में, ऑपरेशन ट्रॉमा सेंटर में
मरीजों को मुख्य भवन के ऊपरी मंजिल के वार्डों में भर्ती किया जाता है, जबकि ऑपरेशन के लिए ट्रॉमा सेंटर ले जाया जाता है। लिफ्ट खराब होने के कारण रैंप के सहारे मरीजों को ले जाना पड़ता है, जिससे जोखिम और परेशानी दोनों बढ़ जाते हैं।

चार जगहों पर बंटी व्यवस्था
अस्थि रोग विभाग की ओपीडी ट्रॉमा सेंटर में होती है, लेकिन भर्ती वहां नहीं होती। मरीजों को जेड, आई वार्ड, एमसीएच भवन और ट्रॉमा सेंटर के बीच बांट दिया जाता है। इससे डॉक्टरों को भी अलग-अलग जगह जाकर मरीज देखने पड़ते हैं।

पोस्ट ऑपरेटिव वार्ड तीन साल से बंद
ट्रॉमा सेंटर का पोस्ट ऑपरेटिव वार्ड पिछले तीन साल से बंद पड़ा है। पुरुष और महिला वार्ड भी बंद हैं, जिसके चलते दोनों को एक ही वार्ड में भर्ती करना पड़ रहा है।

अस्थि रोग विभाग: एक नजर में
ओपीडी: 400 मरीज प्रतिदिन
ऑपरेशन: 20-25 रोजाना
भर्ती: जेड, आई वार्ड, ट्रॉमा सेंटर, एमसीएच भवन

एकीकृत व्यवस्था की मांग
अस्थि रोग विभागाध्यक्ष डॉ. बीएल खजोटिया के अनुसार, अलग-अलग स्थानों पर भर्ती और ऑपरेशन से दिक्कतें बढ़ रही हैं। इस संबंध में एकीकृत व्यवस्था के लिए प्रशासन को पत्र दिया गया है।

प्रशासन का दावा
मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ. सुरेन्द्र कुमार वर्मा ने कहा कि ट्रॉमा सेंटर में शेष कार्य पूरा होते ही मरीजों को एक ही स्थान पर जांच, भर्ती और उपचार की सुविधा देने की व्यवस्था की जाएगी।