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एआई की खेती: अब माटी ही बताएगी कितनी खाद चाहिए

समझौते के तहत कृषि इंजीनियरिंग में एआई आधारित उपकरणों के विकास, अनुसंधान और तकनीक हस्तांतरण पर संयुक्त रूप से काम किया जाएगा।

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समझौते पर ईसीबी के रजिस्ट्रार डॉ. अमित सोनी और अनुसंधान निदेशक डॉ. एन.के. शर्मा ने हस्ताक्षर किए।

समझौते पर ईसीबी के रजिस्ट्रार डॉ. अमित सोनी और अनुसंधान निदेशक डॉ. एन.के. शर्मा ने हस्ताक्षर किए।

खेती अब तकनीक के नए दौर में प्रवेश कर रही है। मृदा स्वास्थ्य जांच से लेकर उर्वरक छिड़काव तक अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित तकनीक किसानों की मदद करेगी। खास बात यह है कि इस तकनीक को किसानों की पहुंच में रखने के लिए कम लागत वाले उपकरण विकसित किए जाएंगे, ताकि खेती की लागत घटे और उत्पादन क्षमता बढ़ सके। इसी दिशा में शुक्रवार को स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय (एसकेआरएयू), इंजीनियरिंग कॉलेज बीकानेर (ईसीबी) और कृषक इनोवेटिव सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड के बीच त्रिपक्षीय एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। समझौते के तहत कृषि इंजीनियरिंग में एआई आधारित उपकरणों के विकास, अनुसंधान और तकनीक हस्तांतरण पर संयुक्त रूप से काम किया जाएगा। अनुसंधान निदेशक डॉ. एन.के. शर्मा ने बताया कि एमओयू के अंतर्गत लैब, उपकरणों और रिसर्च फील्ड्स का साझा उपयोग किया जाएगा। साथ ही किसानों तक नई तकनीक पहुंचाने के लिए प्रशिक्षण, कार्यशालाएं और इंटर्नशिप कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

खेतों में उतरेगा स्मार्ट रोवर, खुद को कर सकेगा एडजस्ट
ईसीबी के रजिस्ट्रार डॉ. अमित सोनी ने बताया कि कृषक इनोवेटिव सॉल्यूशंस और ईसीबी के सहयोग से एक ऑटोमेटेड रोवर विकसित किया गया है। यह रोवर खेती की कई प्रक्रियाओं को स्वचालित तरीके से करने में सक्षम है। रोवर के जरिए फसलों में उर्वरक का छिड़काव किया जा सकेगा। इसकी विशेषता यह है कि किसान इसे फसल की ऊंचाई के अनुसार एडजस्ट भी कर सकेंगे। फिलहाल इस रोवर को स्मार्ट उर्वरक छिड़काव प्रणाली से जोड़ने पर काम चल रहा है।

जरूरत के अनुसार होगा उर्वरकों का छिड़काव
नई तकनीक के जरिए मृदा स्वास्थ्य का स्वत: परीक्षण किया जा सकेगा। इसके बाद मिट्टी की जरूरत के अनुसार ही फसल में उर्वरकों का छिड़काव होगा। इससे जहां उर्वरकों की बर्बादी रुकेगी, वहीं खेती की लागत कम करने और मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने में भी मदद मिलेगी। विशेषज्ञों के अनुसार, यह तकनीक मृदा और फसल स्वास्थ्य की निगरानी में भी उपयोगी साबित होगी।

खेती की लागत और जोखिम घटाने पर फोकस
कृषक इनोवेटिव सॉल्यूशंस के करण नाहटा ने बताया कि कृषि में स्वचालित उपकरणों के उपयोग से किसानों की लागत और जोखिम दोनों कम होंगे। भविष्य में ऐसी तकनीकों को छोटे और मध्यम किसानों के लिए भी सुलभ बनाने पर जोर रहेगा। यह एमओयू अगले तीन वर्षों के लिए किया गया है। समझौते पर ईसीबी के रजिस्ट्रार डॉ. अमित सोनी और अनुसंधान निदेशक डॉ. एन.के. शर्मा ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर डॉ. अमरसिंह गोदारा, डॉ. विक्रम योगी, डॉ. भूपेंद्र सिंह शेखावत, डॉ. राहुल राज चौधरी सहित कई वैज्ञानिक और शिक्षाविद मौजूद रहे।