
5 करोड़ की लागत से बनेगा गो अभयारण्य
बीकानेर. गोवंश के संरक्षण और संवर्धन के लिए ग्राम नापासर में गो-अभयारण्य बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री की मौजूदगी में गो-अभयारण्य के लिए हुए एमओयू के बाद अधिकारी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी करने में जुट गए हैं। गो-अभयारण्य के लिए २२० बीघा जमीन की निशानदेही जल्द होगी। प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार होने के बाद इसका निर्माण कार्य शुरू होगा, जो करीब छह माह में पूरा हो जाएगा। इस पर करीब पांच करोड़ की लागत आएगी।
पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. अशोक विज ने बताया कि गो-अभयारण्य संचालन के लिए नापासर की सोहनलाल बुलादेवी गोशाला समिति के साथ सरकार का एमओयू हुआ है। गो-अभयारण्य में देश के हर हिस्से में पाए जाने वाले देशी नस्ल के गोवंश को रखा जाएगा। इससे एक ही स्थान पर देशी नस्ल के गोवंश का संरक्षण और संवर्धन हो सकेगा। वहीं विदेशी नस्ल के गोवंश को भी इसमें रखा जाएगा। गो-अभयारण्य को पर्यटन केन्द्र के रूप में भी विकसित किया जा सकता है।
सरह बोरला में बनेगी नन्दी गोशाला, सरकार देगी 50 लाख
बीकानेर. शहर में निराश्रित सांडों को रखने के लिए सरह बोरला (जयमलसर) में नन्दी गोशाला का निर्माण होगा। यह नन्दी गोशाला श्री गंगा जुबिली पिंजरापोल गोशाला की ३३०० बीघा भूमि के अन्दर बनेगी। इसके लिए सरकार और गंगा जुबिली पिंजरा पोल गोशाला के बीच एमओय हुआ है। नन्दी गोशाला के निर्माण पर सरकार ५० लाख रुपए खर्च करेगी। निर्माण कार्य सार्वजनिक निर्माण विभाग की देखरेख में होगा।
मुख्यमंत्री के बीकानेर दौरे के दौरान उनकी मौजूदगी में हुए एमओयू के बाद नन्दी गोशाला निर्माण संबंधी प्रक्रिया तेज हो गई है। सरह बोरला में नन्दी गोशाला के लिए जमीन जल्द चिह्नित की जाएगी। संभावना है कि इसी माह इसका निर्माण शुरू हो जाएगा।
हर सांड के लगेगा नीला टैग
नन्दी गोशाला में केवल निराश्रित सांड रखे जाएंगे। इनके रहने, घास-चारा, पानी, टीन शेड, चारदीवारी आदि की व्यवस्था की जाएगी।
हर निराश्रित सांड के नीले रंग का टैग लगाया जाएगा। श्री गंगा जुबिली पिंजरापोल गोशाला समिति के सचिव श्रीभगवान अग्रवाल ने बताया कि नगर निगम शहरी क्षेत्र से निराश्रित सांड को पकड़कर पिंजरापोल गोशाला में छोड़ेगा। यहां टैग लगाने के बाद गोशाला समिति इनको नन्दी गोशाला लेकर जाएगी।
500 सांड रखने होंगे
नन्दी गोशाला में समिति को कम से कम ५०० निराश्रित सांड रखने होंगे। पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. अशोक विज ने बताया कि गोशाला समिति इससे अधिक सांड भी रख सकती है। नन्दी गोशाला के लिए चारदीवारी, चारागृह, चाटा गृह, पानी की खेळी, ठाण, टीन शेड आदि का निर्माण होगा। बीमार सांड के लिए सरकार चिकित्सक और कम्पाउण्डर की सेवाएं उपलब्ध करवाएगी।
Published on:
01 Aug 2018 07:34 pm
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