
रावी की सहायक नदी पर बनेगा बांध, राजस्थान की नहरों को मिलेगा अतिरिक्त पानी
बीकानेर. केन्द्र सरकार ने रावी की सहायक नदी "उज" के पानी को उपयोग में लेने के लिए प्रोजेक्ट तैयार किया है। इससे दो बिलियन क्यूबिक मीटर पानी बचेगा। यह राजस्थान को भी नहरों के माध्यम से सिंचाई और पेयजल की जरूरतों के लिए मिलेगा। केन्द्रीय जलशक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने शनिवार को राजस्थान पत्रिका से विशेष बातचीत में यह जानकारी दी। दरअसल, रावी, व्यास और सतलुज नदी का पानी प्रदेश की गंगनहर, भाखड़ा और इंदिरा गांधी नहर परियोजना के माध्यम से प्रदेश के 13 जिलों को पेयजल और सिंचाई के लिए मिलता है। सहायक नदियों का कुछ पानी व्यर्थ बह जाता है।
केन्द्रीय मंत्री शेखावत ने कहा कि पचास साल में पानी की उपलब्धता नहीं बढ़ी है। उद्योग, शहरीकरण और अन्य आवश्यकताओं के बढ़ने से खपत बढ़ गई है।शेखावत ने कहा कि विभाजन के समय भारत के हिस्से में आई रावी, व्यास और सतलुज नदी पर बांध बनाकर पानी नहरों के माध्यम से प्रदेश में लाया जा रहा है। इनकी सहायक नदियों में कुछ पानी आता है। अब रावी की सहायक नदी उज के पानी को काम लेने के लिए हाई मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है। छह से आठ हजार करोड़ रुपए के इस प्रोजेक्ट में बांध की ड्राइंग फाइनल होने वाली है। इससे नदी का व्यर्थ जाने वाला दो बिलियन क्यूबिक मीटर पानी बचाया जा सकेगा। इसके तय हिस्से के अनुरूप पानी राजस्थान को भी मिलेगा। जो आइजीएनपी के माध्यम से प्रदेश के 13 जिलों तक पहुंचेगा।
चुटकी :क्या सिर्फ बेनीवाल ही कहते है...
आरएलपी प्रमुख हनुमान बेनीवाल की ओर से मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे में दोस्ती होने के आरोप लगाने के सवाल के जवाब में शेखावत पहले मुस्कराए और फिर कहा कि क्या सिर्फ बेनीवाल ही ऐसा कहते हैं...। कांग्रेस की ओर से प्रदेश के लिए कुछ नहीं करने के आरोपों पर शेखावत ने कहा कि केन्द्र सरकार ने जल जीवन मिशन के तहत राजस्थान को सर्वाधिक पैसा दिया, लेकिन राज्य सरकार इसका उपयोग नहीं कर पाई।
तंज : ...और कुछ नहीं तो इस्तीफे वापस ही ले लें, पद की गरिमा बनी रहेगी
शेखावत ने यहां नाल एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बातचीत में राज्य सरकार के मंत्रियों और विधायकों के आ रहे बयानों को लेकर एक बार फिर कांग्रेस को घेरा। बोले-सरकार के एमएलए व मंत्री जिस तरह मुख्यमंत्री पर हमला बोल रहे हैं, शर्मनाक है। जिस तरह लाज-शर्म छोड़ने पर इज्जत चौराहे पर आ जाती है, वैसे ही हालात बने हुए हैं। कहा- ...और कुछ नहीं तो विधायकों को इस्तीफे वापस ही ले लेने चाहिए। इससे पद की गरिमा भी बनी रहेगी। विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी को भी िस्थति स्पष्ट करनी चाहिए।
तेवर : व्यक्तिगत कार्यक्रम कोई मायने नहीं रखता
पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की देव-दर्शन यात्रा के सवाल पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि धार्मिक यात्रा कोई भी व्यक्ति कर सकता है। संगठन के प्रायोजित कार्यक्रम के अतिरिक्त किसी व्यक्ति का कार्यक्रम मायने नहीं रखता।---
पानी से जुड़े 3 महत्वपूर्ण सवालों पर मंत्री शेखावत का जवाब...
1. सवाल: बीबीएमबी में राजस्थान को प्रतिनिधित्व नहीं मिल रहा। इसके लिए केन्द्र सरकार ने क्या किया?
जवाब: भाखड़ा-व्यास मैनेजमेंट बोर्ड (बीबीएमबी) में प्रतिनिधित्व नहीं मिला, यह मिथक है। बोर्ड जलशक्ति मंत्रालय के नहीं बल्कि मिनिस्ट्री ऑफ पॉवर के अधीन आता है। एक अध्यक्ष और दो स्थाई सदस्य होते हैं। एक की नियुक्ति पंजाब पॉवर करता रहा है। दूसरे की नियुक्ति हरियाणा के सिंचाई विभाग के अधिकारी की होते रहने की परम्परा चल रही थी। बीबीएमबी बोर्ड की मीटिंग में सभी हिस्सेदार राज्यों के प्रतिनिधि सदस्य के रूप में शामिल होते हैं। हाईकोर्ट के निर्देश पर केन्द्र सरकार ने सदस्य चयन के नियम बनाए हैं। केंद्रीय बिजली मंत्रालय ने भाखड़ा-ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (संशोधन) नियम-2022 लागू किया है। अधिसूचना भी जारी कर दी है। अब बोर्ड में नई पॉजिशन बनेगी। इसमें राजस्थान को भी प्रतिनिधित्व मिलेगा।
2. सवाल: उत्तर-पश्चिम राजस्थान के सिंचाई व पेयजल समस्या के समाधान के लिए केन्द्र सरकार ने क्या किया?
जवाब: 1400 करोड़ रुपए से चार रिजर्वायर स्वीकृत किए हैं। जो इंदिरा गांधी नहर पर बन रहे हैं। इनमें पानी भंडारित होगा और नहरबंदी तथा किल्लत के समय इस पानी का उपयोग हो सकेगा। रिजर्व वायर से उसके आस-पास के कई किलोमीटर क्षेत्र का भूगोल भी बदल जाएगा। भूमिगत जलस्तर चढ़ने से आस-पास के ट्यूबवैल रिचार्ज होंगे। बांधों में क्षमता से ज्यादा पानी आने पर रिजर्व वायर में छोड़ दिया जाएगा। अभी ज्यादा पानी आने पर पाकिस्तान चला जाता है।
3. सवाल: नहरों में दूषित पानी मिलने से कैंसर जैसी बीमारियां फैल रही है। इसके समाधान के लिए कोई प्रयास...?
जवाब: नहरी पानी में प्रदूषित पानी मिलकर आने की समस्या की जड़ पंजाब में है। लुधियाना के आस-पास तीन तरह का प्रदूषित पानी मिलता है। केमिकल्स फैक्टि्रयों के तरल अपशिष्ट, इलेक्ट्रो इंडस्ट्रीज के अपशिष्ट और डेयरी सेक्टर के अपशिष्ट। एनजीटी कई हजार करोड़ का जुर्माना भी लगा चुकी है। पंजाब सरकार को लिखित में कह भी चुके हैं।
Published on:
13 Nov 2022 12:54 pm
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