
विवि में लगे खजूर।
पश्चिमी राजस्थान की तपती रेत में उगने वाला खजूर अब वैश्विक बाजार में अपनी पहचान बनाने लगा है। स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय (एसकेआरएयू) ने पहली बार बीकानेर से 11 टन से अधिक खजूर का बांग्लादेश निर्यात कर नई उपलब्धि हासिल की है। इस सफलता से न केवल विश्वविद्यालय को आर्थिक लाभ हुआ है, बल्कि क्षेत्र के खजूर उत्पादक किसानों के लिए भी अंतरराष्ट्रीय बाजार के नए द्वार खुलने की उम्मीद जगी है। विश्वविद्यालय के खजूर अनुसंधान परियोजना के तहत इस वर्ष पहली बार 11 टन से अधिक खजूर बांग्लादेश भेजा गया। निर्यात में हलावी किस्म की हिस्सेदारी सबसे अधिक रही, जबकि खुदरावी और खुनैजी किस्मों का भी निर्यात किया गया। इस परियोजना से विश्वविद्यालय को करीब 10 लाख रुपए की आय हुई है।
देश में भी बढ़ रही मांग
अंतरराष्ट्रीय निर्यात के अलावा एसकेआरएयू ने इस वर्ष जम्मू-कश्मीर, महाराष्ट्र और पंजाब सहित विभिन्न राज्यों में भी करीब 10 टन खजूर की आपूर्ति की है। विश्वविद्यालय से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि दक्षिण एशिया के अन्य देशों में भी निर्यात की संभावनाओं पर काम किया जा रहा है, जिससे भविष्य में थार का खजूर बड़ा निर्यात उत्पाद बन सकता है।
350 हेक्टेयर में हो रही खेती
वर्तमान में बीकानेर जिले में करीब 350 हेक्टेयर क्षेत्र में खजूर की खेती हो रही है। राज्य सरकार किसानों को बगीचा स्थापना के लिए अनुदान उपलब्ध करा रही है। वहीं विश्वविद्यालय का खजूर अनुसंधान केंद्र किसानों को नियमित प्रशिक्षण देने के साथ गुणवत्तायुक्त ऑफ-शूट प्लांट तैयार कर उपलब्ध कराने की दिशा में भी कार्य कर रहा है।
54 से अधिक किस्मों का संरक्षण
खजूर अनुसंधान केंद्र के प्रभारी डॉ. राजेंद्र सिंह राठौड़ ने बताया कि विश्वविद्यालय में आईसीएआर की अखिल भारतीय समन्वित शुष्क फल अनुसंधान परियोजना के तहत 54 से अधिक किस्मों का संरक्षण एवं संवर्धन किया जा रहा है। इनमें हलावी, बरही और मेडजूल जैसी लोकप्रिय एवं उच्च गुणवत्ता वाली किस्में शामिल हैं। उत्पादन बढ़ाने के लिए सकर्स (ऑफ-शूट) के माध्यम से पौध तैयार करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
47 वर्षों के शोध को मिली नई पहचान
विश्वविद्यालय में वर्ष 1979 से खजूर पर अनुसंधान किया जा रहा है। पहली बार अंतरराष्ट्रीय निर्यात होने से इस शोध को नई पहचान मिली है। कुलगुरु डॉ. राजेंद्र बाबू दुबे ने कहा कि बांग्लादेश को खजूर का निर्यात विश्वविद्यालय के लिए बड़ी उपलब्धि है। इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बीकानेर के खजूर की पहचान मजबूत होगी और क्षेत्र के किसान भी व्यावसायिक स्तर पर खजूर की खेती के लिए प्रेरित होंगे।
Updated on:
10 Jul 2026 07:13 pm
Published on:
10 Jul 2026 07:13 pm
