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दियाली रा दिया दीठा काचर, बोर, मतीरा मीठा

diwali festival, kachar, bor, matira

diwali festival, kachar, bor, matira

दीपावली पर मरुस्थलीय क्षेत्र में बारानी फलों की पूजा की परम्परा रही है। इन ऋतु फलों काचर, बोर, मतीरा को दीपावली पूजन में लक्ष्मी को चढाया जाता है।

अगले दिन गोवर्धन पूजा में भी ऋतु फल कचरा, बोर, मतीरा तथा बूर घास के तिनके रखे जाते हैं। लोग हर्षोल्लास में कहते हैं 'दियाली रा दीया दीठा काचर, बोर, मतीरा मीठा। यह पश्चिमी राजस्थान की परम्परा है।

राजस्थान में हमेशा से ही बारानी खेती वर्षा पर आधारित रही है। अकाल की स्थिति होने पर झड़बेरी के बेर तथा कम पानी में होने वाले मरुस्थलीय फल, काचर तथा मतीरा हो जाते हैं। इन फलों को विशेष तौर से पूजा में रखा जाता है।

बीकानेर शहर में हर चौराहे, गली-मौहल्ले में इन ऋतु फलों की बिक्री के लिए छोटी-छोटी दुकानें लगती हैं। लोग दीपावली का त्यौहार नजदीक आते ही इन ऋतु फलों की खरीद करने लगते हैं। इसे लक्ष्मी जी का प्रसाद मानकर चढ़ाया जाता है।

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