
Ashok Gehlot on Kirodi Lal Meena - Seeds Bribe Case
राजस्थान राज्य बीज निगम के डायरेक्टर जुगल किशोर विश्नोई और उनके रिश्तेदार स्वतंत्र ज्याणी की 2.43 करोड़ रुपए की भारी घूस लेते रंगे हाथों हुई गिरफ्तारी का मामला राजनीतिक गलियारों में छाया हुआ है। इस मामले में मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस लगातार एक के बाद एक अपने बड़े तीखे बयानों से सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) और विशेष रूप से सरकार के सबसे वरिष्ठ कैबिनेट मंत्रियों में से एक डॉ. किरोड़ी लाल मीणा को कटघरे में खड़ा कर रही है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के आक्रामक बयानों के बाद अब इस सियासी जंग में खुद पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की सीधी एंट्री हो गई है।
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस घूसकांड को केवल एक साधारण प्रशासनिक भ्रष्टाचार मानने से पूरी तरह इंकार कर दिया है। उनका साफ कहना है कि कृषि विभाग और बीज निगम में किसानों को बांटे जाने वाले नकली खाद-बीज की जांच करने के नाम पर जो दिखावा किया जा रहा था, उसकी आड़ में पर्दे के पीछे एक बहुत बड़ा ब्लैकमेलिंग का नेटवर्क काम कर रहा था। इस नेटवर्क के तार बिना किसी बड़े राजनीतिक और उच्च स्तरीय संरक्षण के इतने मजबूत नहीं हो सकते थे। इसलिए इस पूरे नेक्सस का सच जनता के सामने आना बेहद जरूरी है।
इस मामले में सबसे बड़ा राजनीतिक मोड़ तब आया जब अशोक गहलोत ने दावा किया कि इस पूरे मामले की कड़ियां बहुत ऊपर तक जुड़ी हुई प्रतीत होती हैं। प्रशासनिक व्यवस्था में कोई भी अधिकारी बिना किसी बहुत बड़े उच्च स्तरीय संरक्षण या वरदहस्त के किसी एक ही व्यापारिक फर्म या सिंडिकेट से 2.43 करोड़ रुपए जैसी इतनी बड़ी और भारी-भरकम घूस राशि मांगने का साहस कतई नहीं कर सकता।
इसी आधार पर अशोक गहलोत ने सीधे मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को संबोधित करते हुए मांग की है, ''मुख्यमंत्री जी से मेरी यह स्पष्ट मांग है कि राजस्थान के किसानों के हितों के साथ इतना बड़ा कुठाराघात करने वाले इस पूरे प्रशासनिक और आपराधिक नेक्सस की गहराई से जांच हो। इस जांच के दायरे में स्वयं कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा जी तक की भूमिका को शामिल किया जाए और इसकी एक पूर्णतया निष्पक्ष व उच्च स्तरीय जांच करवाई जाए, जिससे दूध का दूध और पानी का पानी हो सके और वास्तविक सच प्रदेश की जनता के सामने आ सके।"
अशोक गहलोत ने अपने आधिकारिक बयान में एसीबी की इस बड़ी कार्रवाई का स्वागत करते हुए सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर जारी अपनी पोस्ट में लिखा कि प्रदेश के कृषि विभाग व बीज निगम में करोड़ों रुपये के नकली बीज घूसकांड का एसीबी द्वारा भंडाफोड़ होना बेहद चिंताजनक और गंभीर विषय है। यह मामला सीधे तौर पर राजस्थान के लाखों गरीब किसानों और अन्नदाताओं के भरोसे से जुड़ा हुआ है।
गहलोत ने आगे बेहद तल्ख लहजे में टिप्पणी करते हुए कहा कि जो अधिकारी पिछले दिनों कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा के साथ अग्रिम पंक्ति में खड़े होकर बड़ी-बड़ी 'छापेमारी' करने का नाटक कर रहे थे, वे ही लोग असल में बैकडोर से व्यापारियों को कानूनी कार्रवाई की धमकी देकर करोड़ों रुपए की वसूली व ब्लैकमेलिंग का सिंडिकेट चला रहे थे।
पूर्व मुख्यमंत्री का इशारा साफ तौर पर बीज निगम के गिरफ्तार डायरेक्टर जुगल किशोर विश्नोई की तरफ था, जो किरोड़ी लाल मीणा द्वारा सीकर, बीकानेर और जोधपुर संभाग में की गई औचक जांचों के दौरान हर जगह उनके ठीक बगल में खड़े दिखाई देते थे।
कृषि विभाग के इस घूसकांड ने राजस्थान कांग्रेस को भजनलाल सरकार के खिलाफ एक बहुत बड़ा और अचूक राजनीतिक हथियार दे दिया है। अशोक गहलोत के इस बयान से पहले कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने इस मामले को भाजपा सरकार के संरक्षण में होने वाली 'संगठित डकैती' करार दिया था।
डोटासरा ने बेहद आक्रामक अंदाज में आरोप लगाया था कि पूरे राजस्थान भर के खाद-बीज व्यापारियों को डरा-धमकाकर और कार्रवाई का खौफ दिखाकर करीब 500 करोड़ रुपए की भारी अवैध उगाही किए जाने के गंभीर इनपुट सामने आ रहे हैं।
दूसरी ओर, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भी सरकार की तथाकथित 'जीरो टॉलरेंस' की नीति पर तीखा प्रहार करते हुए कहा था कि पहले विभाग के जरिए बड़ी बीज कंपनियों पर जांच के नाम पर जानबूझकर छापे मारे जाते हैं और फिर अपने चहेते अधिकारियों को पर्दे के पीछे से सेटिंग करने के लिए भेजकर करोड़ों की वसूली की जाती है।
अब इस पूरे विवाद में अशोक गहलोत के कूदने से कांग्रेस का यह 'हल्ला बोल' पूरी तरह से शीर्ष स्तर पर पहुंच गया है, जिससे भाजपा के भीतर भी अंदरूनी बेचैनी बढ़ने के आसार दिखाई दे रहे हैं।
इस पूरे हाई-वोल्टेज घूसकांड मामले में सबसे दिलचस्प बात यह है कि हमेशा हर मुद्दे पर बेहद बेबाक और मुखर रहने वाले कैबिनेट कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा की तरफ से पिछले 24 घंटों में कोई भी नया आधिकारिक बयान या प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। कांग्रेस के इन तमाम तीखे और सीधे हमलों पर किरोड़ी लाल मीणा की यह रहस्यमयी चुप्पी राजनीतिक हलकों में कई तरह की चर्चाओं को जन्म दे रही है।
चर्चा इसलिए भी तेज है क्योंकि अभी पिछले ही सप्ताह जब सीकर में व्यापारियों ने कृषि विभाग के अफसरों पर 20 लाख रुपए की घूस मांगने के आरोप लगाए थे, तब किरोड़ी लाल मीणा ने पूरी निष्ठा के साथ अपने अधिकारियों का बचाव किया था। उन्होंने तब साफ शब्दों में कहा था कि "यदि मेरी टीम पर भ्रष्टाचार का एक भी आरोप सिद्ध हो जाए तो मैं अपना मंत्री पद छोड़ दूँगा।"
अब चूंकि भ्रष्टाचार का यह आरोप किसी छोटे कर्मचारी पर नहीं, बल्कि सीधे उनके साथ साए की तरह घूमने वाले बीज निगम के डायरेक्टर जुगल किशोर विश्नोई पर सिद्ध हुआ है और वह 2.43 करोड़ की ऐतिहासिक घूस के साथ रंगे हाथों पकड़े गए हैं, इसलिए किरोड़ी लाल मीणा के इसी पुराने 'इस्तीफा चैलेंज' को लेकर विपक्ष उन पर लगातार दबाव बना रहा है।
Updated on:
08 Jun 2026 03:18 pm
Published on:
08 Jun 2026 03:07 pm
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