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कैबिनेट मंत्री डॉ किरोड़ी लाल मीणा ने फिर दी इस्तीफा देने की चेतावनी, डिपार्टमेंट की टीम पर 20 लाख की रिश्वत के आरोपों से हैं आहत

सीकर बीज विवाद और ₹20 लाख रिश्वत के आरोपों पर कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा का बड़ा बयान। भ्रष्टाचार सिद्ध होने पर पद छोड़ने की चेतावनी, पहले भी दे चुके हैं इस्तीफा।

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Kirodi Lal Meena

मंत्री किरोड़ी लाल मीणा (फोटो-पत्रिका नेटवर्क)

राजस्थान के सीकर जिले में कृषि विभाग की टीम और स्थानीय बीज व्यवसायियों के बीच उपजा गंभीर प्रशासनिक गतिरोध अब पूरी तरह से राज्य स्तर पर एक बड़े राजनीतिक संग्राम में तब्दील हो चुका है। सांवली रोड पर हुई झड़प, राजकार्य में बाधा और व्यापारियों द्वारा विभागीय टीम पर लगाए गए 20 लाख रुपए की भारी-भरकम रिश्वत के आरोपों पर अब सीधे कैबिनेट कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने मोर्चा संभाल लिया है। अपनी बेबाक कार्यशैली और कड़े फैसलों के लिए पहचाने जाने वाले मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने शनिवार को इस पूरे विवाद पर अपनी पहली तीखी और बेहद गंभीर प्रतिक्रिया व्यक्त की है।

कैबिनेट मंत्री ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल्स पर बेहद सख्त लहजे में अपनी बात रखी और भारतीय जनता पार्टी राजस्थान (@BJP4Rajasthan) और मुख्यमंत्री कार्यालय (@RajCMO) को भी टैग कर दिया। मंत्री के इस बयान के बाद पूरे प्रदेश के प्रशासनिक अमले और राजनीतिक हल्कों में इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि क्या सीकर का यह स्थानीय बीज विवाद अब सरकार के भीतर एक नया संकट पैदा कर सकता है, क्योंकि किरोड़ी लाल मीणा ने अपनी पुरानी रवायत के मुताबिक एक बार फिर से सीधे तौर पर पद छोड़ने की बड़ी चेतावनी दे डाली है।

अपनी विभागीय टीम का खुलकर किया बचाव

सीकर में जिला कृषि आदान विक्रेता संस्थान और विकास सीड्स के संचालकों द्वारा कृषि विभाग के कर्मचारियों पर लगाए गए मानसिक प्रताड़ना और अवैध वसूली के गंभीर आरोपों को कृषि मंत्री ने सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी बात रखते हुए साफ किया कि उनकी टीम किसी भी तरह के गलत काम में लिप्त नहीं थी, बल्कि वे राज्य के गरीब किसानों की फसलों को बर्बाद होने से बचाने के लिए अपनी आधिकारिक ड्यूटी निभा रहे थे।

कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने अपनी पोस्ट में लिखा, "नकली बीज माफियाओं के खिलाफ हमारी टीम ने पूरी निष्ठा और ईमानदारी से कार्रवाई की। झूठे आरोप लगाकर किसानों की लड़ाई को कमजोर नहीं किया जा सकता। यदि भ्रष्टाचार का एक भी आरोप सिद्ध हो जाए तो पद छोड़ दूँगा। लेकिन किसानों के हितों से समझौता कभी नहीं होगा।"

मंत्री के इस कड़े रुख से यह पूरी तरह साफ हो गया है कि वे सीकर में जांच करने गई विभागीय टीम के साथ पूरी मजबूती से खड़े हैं और व्यापारियों के दबाव के आगे झुकने के मूड में बिल्कुल भी नहीं हैं।

एक भी आरोप सिद्ध हुआ तो पद छोड़ दूँगा

सीकर के व्यापारियों ने जिस तरह से कृषि विभाग के कर्मियों पर 20 लाख रुपए की घूस मांगने के संगीन आरोप लगाए हैं, उसे मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने एक सुनियोजित साजिश करार दिया है। उन्होंने इस मुद्दे पर अपने आत्मसम्मान और ईमानदारी की दुहाई देते हुए सरकार और जनता के सामने एक बेहद बड़ी शर्त रख दी है जो उनके स्वभाव के पूरी तरह अनुकूल मानी जाती है।

डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने दो टूक शब्दों में कहा, "यदि मेरे विभाग या मेरी टीम के खिलाफ भ्रष्टाचार का एक भी आरोप कानूनी और तथ्यात्मक रूप से सिद्ध हो जाए, तो मैं उसी क्षण अपना कैबिनेट मंत्री का पद छोड़ दूँगा। लेकिन इसके साथ ही मैं यह भी पूरी तरह साफ कर देना चाहता हूँ कि चंद रसूखदार लोगों के दबाव में आकर राजस्थान के करोड़ों किसानों के हितों से समझौता कभी नहीं होगा।"

मंत्री का यह सीधा बयान इस बात का संकेत है कि वे इस पूरे मामले की किसी भी स्तर की जांच के लिए पूरी तरह तैयार हैं और उन्हें अपनी टीम की ईमानदारी पर पूरा भरोसा है।

क्या है ये पूरा विवाद?

इस पूरे सियासी और प्रशासनिक घमासान को गहराई से समझने के लिए इस विवाद के जमीनी बैकग्राउंड को जानना बेहद आवश्यक है। दरअसल, यह पूरा मामला 4 जून को सीकर जिले के सांवली चौराहे के पास स्थित एक होटल और बीकानेर बाईपास पर संचालित विकास सीड्स और बालाजी एग्रो इंडस्ट्रीज के गोदामों से शुरू हुआ था। कृषि विभाग के कर्मचारी संदीप कुमार और रजनीश कुमार एक गोपनीय इनपुट के आधार पर वहां खीरे के नकली और अमानक बीजों की अवैध री-पैकिंग की जांच करने पहुंचे थे।

विभागीय टीम का आरोप है कि जांच के दौरान स्थानीय व्यापारियों और उनके सहयोगियों ने उनके साथ गंभीर मारपीट की, राजकार्य में बाधा पहुंचाई और उन्हें गाड़ी में डालकर अपहरण करने का प्रयास किया, जिसकी एफआईआर (FIR) सदर थाने में दर्ज कराई गई। इसके विरोध में स्थानीय व्यापारियों ने पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि कृषि विभाग के ये कर्मचारी वैध व्यापार को बंद करने की धमकी देकर 20 लाख रुपए की घूस मांग रहे थे और प्रताड़ित कर रहे थे।

कांग्रेस ने भी मंत्री पर साधा निशाना

इस्तीफा देने की चेतावनी किरोड़ी लाल मीणा के लिए नई नहीं

कैबिनेट मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा द्वारा भ्रष्टाचार का आरोप सिद्ध होने पर पद छोड़ने की यह चेतावनी कोई पहला वाकया नहीं है। राजस्थान की राजनीति को करीब से जानने वाले विश्लेषक अच्छी तरह जानते हैं कि किरोड़ी लाल मीणा को 'बाबा' के नाम से जाना जाता है और वे अपने सिद्धांतों, वादों और लोक-कल्याण के मुद्दों के लिए अपने ही राजनीतिक पदों को दांव पर लगाने के लिए अपनी एक अलग ही पहचान रखते हैं। उनके राजनीतिक जीवन से जुड़े कुछ ऐसे ही बड़े इस्तीफों के प्रसंग इस प्रकार हैं:

  • लोकसभा चुनाव 2024 का ऐतिहासिक इस्तीफा: वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने सार्वजनिक रूप से एक बड़ी घोषणा की थी कि यदि उनके प्रभाव वाले दौसा, सवाई माधोपुर और भरतपुर अंचल की लोकसभा सीटें भारतीय जनता पार्टी हार जाती है, तो वे अपने मंत्री पद से तुरंत त्यागपत्र दे देंगे। चुनावों के परिणाम आने के बाद जब दौसा सहित कुछ सीटों पर भाजपा को हार का सामना करना पड़ा, तो किरोड़ी लाल मीणा ने अपने वादे पर अडिग रहते हुए वास्तव में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को अपना आधिकारिक इस्तीफा सौंप दिया था। हालांकि, बाद में मुख्यमंत्री और केंद्रीय आलाकमान के लंबे मान-मनौव्वल और समझाइश के बाद उन्होंने अपना इस्तीफा वापस लिया और दोबारा कार्यभार संभाला था।
  • विपक्षी काल और पूर्ववर्ती सरकारों में बगावती तेवर: केवल अपनी ही सरकार में नहीं, बल्कि पूर्व की सरकारों में भी जब वे कैबिनेट का हिस्सा थे, तब भी आदिवासियों के अधिकारों, युवाओं के रोजगार और किसानों के मुद्दों पर प्रशासनिक असहमति होने के चलते वे कई बार अपना इस्तीफा अपनी ही जेब में लेकर चलने वाले नेता के रूप में जाने जाते रहे हैं। यही कारण है कि उनके इस नए सोशल मीडिया पोस्ट को भी राजनीतिक हलके बेहद गंभीरता से ले रहे हैं।