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ऐसा खेल, जिसमें आठ साल से लेकर साठ साल तक के बुजुर्ग तक भर रहे कुलाचें

बीकानेर के सार्दुल स्पोर्ट्स स्कूल में आयोजित 100 मीटर दौड़ में 70 साल के रामसुख जनागल दौड़े, तो उनके साथ छोटे बच्चों ने भी दौड़ लगाई। ऐसा दृश्य और भी कई मैदानों में देखने को मिला।

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ऐसा खेल, जिसमें आठ साल से लेकर साठ साल तक के बुजुर्ग तक भर रहे कुलाचें

ऐसा खेल, जिसमें आठ साल से लेकर साठ साल तक के बुजुर्ग तक भर रहे कुलाचें

बीकानेर. शहर से लेकर गांव तक इन दिनों हर वर्ग, हर उम्र के लोगों में उत्साह देखते ही बन रहा है। कम उम्र के किशोर हों या युवा अथवा बुजुर्ग, सभी पूरे जोशो खरोश के साथ इन खेलों में भागीदारी निभा रहे हैं। मौका है राजीव गांधी शहरी और ग्रामीण ओलंपिक खेलों की ग्राम पंचायत तथा नगरीय निकाय स्तरीय प्रतियोगिताओं का। मिली जानकारी के मुताबिक, जिले की 366 ग्राम पंचायतों तथा नगरीय निकायों के 29 क्लस्टर क्षेत्रों में 45 हजार से अधिक खिलाड़ियों में भागीदारी निभाई।

बालिकाओं ने रस्साकशी और कबड्डी जैसे खेलों में भाग लिया तो लड़कों में टेनिस बाल क्रिकेट और वॉलीबॉल के प्रति क्रेज दिखा। दूसरे दिन बड़ी संख्या में शहरी और ग्रामीण लोगों ने इन खेलों को देखा। साथ ही खिलाड़ियों की हौसला अफजाई की। प्रत्येक खेल के दोनों पक्षों के लोग अपने अपने खिलाड़ियों के पक्ष में हूटिंग करते रहे। वृद्धजनों ने भी कबड्डी में हाथ आजमाए। ग्राम पंचायत और नगरीय निकाय स्तरीय खेल प्रतियोगिताएं 10 अगस्त तक जारी रहेंगी।

अपने तरह के अनूठे खेल आयोजन में 8 से साठ वर्ष तक के खिलाड़ी एक साथ खेलते दिख रहे हैं। बीकानेर के सार्दुल स्पोर्ट्स स्कूल में आयोजित 100 मीटर दौड़ में 70 साल के रामसुख जनागल दौड़े, तो उनके साथ छोटे बच्चों ने भी दौड़ लगाई। ऐसा दृश्य और भी कई मैदानों में देखने को मिला। जनागल ने खेलों की थीम को सराहा और कहा कि भावी पीढ़ी को खेलों से जोड़ने के साथ उन्हें प्लेटफार्म उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से यह खेल महत्वपूर्ण साबित होंगे।

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