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सुविधा इंसान को कमजोर बना रही, साधुमार्गी तपस्वी जीवन से मिल रहा संदेश

जहां निवास करे, उस परिसर में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का प्रवेश ही वर्जित। मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का उपयोग नहीं करते भीनासर में प्रवास। तपस्वी जीवन से मिल रही समाज को चेतना।

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दिनेश कुमार स्वामी@बीकानेर. भौतिक युग में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और सुख-सुविधाओं का इंसान ज्यादा से ज्यादा उपभोग को लालायित दिखता है। ऐसे में कोई भीषण गर्मी में बिना पंखे-कूलर के रहे। जहां निवास करे, उस परिसर में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का प्रवेश ही वर्जित हो। दो जोड़ी वस्त्र, भिक्षा में मिला सादे भोजन का सेवन, नंगे पांव चलना और तन पर मामूली वस्त्रों में सर्दी-गर्मी में रहना। यह कठिन तप साधुमार्गी आचार्यश्री रामलाल और उनके कुनबे के 450-500 साधु-साध्वी कर रहे हैं। इनका जीवन भौतिक सुख-सुविधाओं का सीमित उपभोग की समाज में नई चेतना जागृत कर रहा है।

आचार्यश्री और उनके कुनबे के साधु-साध्वी 12 अप्रेल से भीनासर में श्रीजवाहर विद्या पीठ में प्रवास कर रहे हैं। यहां आचार्यश्री रोजाना करीब 40 मिनट प्रवचन भी देते हैं। बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविका प्रवचन में पहुंचते हैं। इस दौरान उन पर भी यह कड़े प्रतिबंध लागू रहते हैं। परिसर में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का प्रवेश वर्जित है। यहां तक की बिजली आपूर्ति तक बंद रहती है। बिना पंखा-कूलर और माइक के आचार्यश्री के स्वरों की ओर अनुयायी मुखातिब होते हैं।

कष्ट सहने से मजबूत होता है तन-मन

साधुमार्गी आचार्यश्री और उनके कुनबे के 495 साधु-साध्वियों के तपस्वी जीवन से जो संदेश निकलता है, वह भौतिक सुविधाओं में रचे-बसे लोगों के लिए महत्वपूर्ण है। तपस्वी जीवन से अनुभूति होती है कि सुविधा इंसान को कमजोर बना रही है। मन और स्वास्थ्य कष्टों को सहन करने से मजबूत होता है। सुविधा में जीना मनुष्य को दु:खी बनाता है। आज बच्चों के मोबाइल का उपयोग करने को लेकर हर परिवार चिंतित है। इन साधु-साध्वियों के तप से संदेश मिलता है कि हम अपना त्याग कर बदलाव ला सकते हैं। अकेले उपदेशों से अगली पीढ़ी ज्यादा कुछ नहीं सीखेगी।

घड़ी तक बांधना वर्जित

आचार्यश्री और उनके कुनबे के साधु-साध्वी सूर्यास्त के बाद कुछ भी ग्रहण नहीं करते। बिछोना भी गत्ते के टुकड़ों को बिछाकर बनाते है। मोबाइल, पंखा तो दूर इलेक्ट्रोनिक घड़ी तक बांधना वर्जित है। अभी कुछ दिन यह तपस्वी यहां प्रवास और विचरण करेंगे। इसके बाद आचार्यश्री रामलाल अपनी जन्मभूमि देशनोक में चतुरमास करेंगे। यह साधुमार्गी अपने फोटो और प्रचार-प्रसार से दूर रहते है। इनके जीवन से निकल रहे संदेश को यहां साझा किया जा रहा है।

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