
वर्षों बाद घरों में गूंजी किलकारी, ख्वाहिशें पूरी
हर महिला के जीवन का सपना मां बनने का होता है। इसीलिए मातृत्व को सबसे बड़ा सुख माना गया है और वात्सल्य-भाव को एक रस की श्रेणी में रखा गया है। इसी सपने को पूरा करने की चाह में कई महिलाओं ने जगह-जगह इलाज कराया, मंदिर-देवरा तक पहंची, लेकिन मां बनने की आस पूरी नहीं हुई। ऐसे में उन्हें दुविधाएं सताने लगी। आखिर वर्षों बाद उनकी अरदास सुन ली गई। विज्ञान के चमत्कार से आज छह महिलाओं की गोद में बच्चा है। घर में खुशियां हैं मानों यह फिल्मी गीत 'तुझे सूरज कहूं या चंदा, तुझे दीप कहूं या तारा, मेरा नाम करेगा रोशन जग में मेरा राजदुलारा' साकार हो गया है।
एक साल पहले हुई थी शुरू
एसपी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आरपी अग्रवाल ने बताया कि पीबीएम अस्पताल में एक सितंबर, 2016 को फर्टिलिटी क्लिनिक शुरू की गई थी। तब से 491 नि:संतान दंपतियों ने पंजीकरण कराया है। इसमें भी खुशी व राहत की खबर यह है कि 491 में से 44 महिलाएं अभी गर्भवती हैं और तीन महिलाओं ने स्वस्थ्य बच्चों को जन्म दिया है।
गर्भवतियों व बच्चों का सम्मान
फर्टिलिटी क्लिनिक में जन्में बच्चे एक साल के होने पर शुक्रवार को यहां कार्यक्रम आयोजित किया गया। मुख्य अतिथि प्राचार्य डॉ. अग्रवाल थे। कार्यक्रम में क्लिनिक शुरू होने के बाद बच्चे को जन्म देने वाली महिलाओं और अभी गर्भवती महिलाओं को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में दो महिलाएं अपने नवजात बच्चों के साथ पहुंची। कार्यक्रम में केक भी काटा गया।
केस : 1
गंगाशहर निवासी संतोष। शादी के चार साल बाद बेटा पैदा हुआ। घर-परिवार में खुशियों का कोई ठिकाना नहीं। इससे पूर्व भी वह पहले दो बार गर्भवती हुई, लेकिन दिक्कतों के चलते गर्भ में बच्चे की मौत हो जाती। दवा लेते परेशान हो गई। मां बनने की आास छोड़ चुकी थी। तभी उम्मीद की किरण एक साल पहले नजर आई और आज गोद में एक बेटा है।
केस : 2
भीनासर निवासी सविता। शादी को दस साल बाद भी मां बनने की आस पूरी नहीं हुई। औलाद पाने के लिए मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे पर गई, लेकिन कोई उम्मीद की किरण नजर नहीं आई। एक साल पहले पीबीएम में फर्टिलिटी क्लिनिक शुरू होने की राजस्थान पत्रिका में खबर पढ़कर डॉ. मोनिका से संपर्क किया। अब वह पांच महीने की गर्भवती है।
सरकारी स्तर पर सुविधा
फर्टिलिटी क्लिनिक में इलाज के लिए पहुंची महिलाओं में से ४१ गर्भवती हैं और छह ने स्वस्थ बच्चों को जन्म दिया है। बीकानेर में
यह सुविधा सरकारी स्तर पर मिल रही है। हमें खुशी है कि हमें इसमें सफलता मिल रही है। यहां से इलाज लेने के बाद पहली बेबी को सिमरन ने जन्म दिया। उसके बाद दूसरा बच्चा संतोष को हुआ।
डॉ. मोनिका सोनी, प्रभारी, फर्टिलिटी क्लिनिक पीबीएम
Published on:
02 Sept 2017 09:36 am
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