
Gravel Price: क्यों आसमानी हो रहे हैं बजरी के भाव, कुछ दिनों में 40-50 फीसदी तक उछले भाव
बीकानेर. बजरी के बढ़े हुए भावों ने घर बनाना महंगा कर दिया है। सबसे बड़ा असर सरकारी निर्माण पर हुआ है। बड़े ठेकेदार हों या अपना छोटा सा घर बनाने का सपना लेकर जीने वाला निम्न मध्यमवर्ग, लगभग सभी ने फिलहाल निर्माण से हाथ खींच लिए हैं। जानकारी के मुताबिक बजरी की सीधे 40 से 50 फीसदी तक दामों में बढ़ोत्तरी ने सभी के हौसले पस्त कर दिये हैं। संकट और गहरा तब हो जाता है, जब पीछे से बजरी की आवक लगभग ठप सी हो गई है, क्योंकि ट्रक ऑपरेटर भी ओवरलोड के मुद्दे पर प्रशासन की सख्ती से नाराज चल रहे हैं।
सरकारी निर्माण भी धीमे पड़े
जानकारों के अनुसार इनके बढ़ते भावों का असर प्रधानमंत्री आवास योजना व नहर की लाइनिंग के कार्य पर भी देखने को मिला है। इन पर सबसे ज्यादा असर बजरी के दामों में बढ़ोत्तरी की वजह से पड़ा है, जो पिछले कुछ दिनों में 40 से 50 फीसदी प्रति टन बढ़ गए हैं।
निर्माण सामग्री की बिक्री भी 50 फीसदी तक घटी
व्यापारी रामचंद्र गहलोत ने बताया कि निर्माण सामग्री में काम आने वाले सरिये के भावों में भी बढ़ोतरी हुई है। कुछ समय पहले जो सरिया 72 से 73 रुपए प्रति किलो था, वह बढ़कर 85 से 90 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गया। गहलोत ने बताया कि सरिये के दामों में हुई बढ़ोतरी का असर बिक्री पर भी देखने को मिला। इसके चलते इसकी बिक्री 40 से 50 फीसदी तक कम हो गई। सीमेंट व्यवसायी भरत चोपड़ा ने बताया की कोयले और डीजल के दामों में बढ़ोतरी होने के कारण सीमेंट के दामों में 50 रुपए की बढ़ोतरी हुई है।
जरा बजरी के दामों पर नजर डालें
बजरी के दाम लगातार आसमान छू रहे हैं। इसके भाव में 40 से 50 फीसदी प्रति टन की बढ़ोतरी हो गई, जो बजरी पहले 300 से 320 रुपए प्रति टन के हिसाब से मिलती थी, वही अब 460 से 480 रुपए प्रति टन के हिसाब से मिल रही है। जानकारों के अनुसार डीजल के बढे दाम, ट्रकों की हड़ताल व ओवरलोडिंग बंद होने के कारण बजरी के दामों में बढ़ोतरी हुई है। अन्य निर्माण सामग्री के दाम पहले अब सीमेंट ओपीसी - 350 से 360 - 400 से 410 सीमेंट पीपीसी - 325 से 335 - 375 से 385 (प्रति 50 किलो कट्टा) ईंट- 4600 - 4800 गटर- 70 से 75 - 85 से 90
Published on:
21 Apr 2022 06:48 pm
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