13 जनवरी 2026,

मंगलवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

छत्रपति शिवाजी को भगाने में राजा जयसिंह और रामसिंह की रही थी भूमिका

bikaner rajasthan state archives record fact series: एतिहासिक किवदन्तियों को वास्तविकता प्रदान करने के लिए आवश्यक है अभिलेखागार के दस्तावेज।

2 min read
Google source verification
छत्रपति शिवाजी को भगाने में राजा जयसिंह और रामसिंह की रही थी भूमिका

छत्रपति शिवाजी को भगाने में राजा जयसिंह और रामसिंह की रही थी भूमिका

Gest Writer डॉ. महेन्द्र खडग़ावत,

निदेशक, राजस्थान राज्य अभिलेखागार बीकानेर

छत्रपति शिवाजी महाराज के मुगल सम्राट औरंगजेब के दरबार में उपस्थित होने, उचित सम्मान न मिलने पर दरबार छोड़कर जाने तथा आगरा से भागने को लेकर कई किवदन्तियां है। एतिहासिक किवदन्तियों को वास्तविकता प्रदान करने के लिए आवश्यक है अभिलेखागार के दस्तावेज।

शिवाजी महाराज को यद्यपि ''पुरन्दर की संधि में मुगल दरबार में व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट दी गई थी, परन्तु जयपुर के वकील प्रकाल दास की रिपोर्ट शिवाजी महाराज के आगरा में प्रवेश, उनके साथ सेना, उनके व्यक्तित्व का उल्लेख तथा मुगल दरबार में शिवाजी को उचित सम्मान न मिलने पर दरबार छोड़कर जाने का आंखों देखे हाल का वर्णित है। ऐसा प्रतित होता है कि शिवाजी की सुरक्षा का औरंगजेब से वचन लेने के पश्चात् ही उनको आगरा भेजने के लिए मिर्जा राजा ने ही तैयार किया होगा।

इतिहासकार, देश-विदेश के शोधार्थी व आमजन में यह चर्चा का विषय है कि शिवाजी को आगरा से भगाने में किसकी भूमिका थी? शिवाजी के आगरा से फरार होते ही मुगल सम्राट औरंगजेब ने उस समय दक्षिण में मौजूद मिर्जा राजा जयसिंह को फरमान लिखा। उसकी प्रति कहीं भी उपलब्ध नहीं है परन्तु, उसकी मुख्य बातें अखबारात -ए -दरबारात- ए-मुल्क में मिलती है।

जिसमें औरंगजेब, मिर्जा राजा को लिखते है ''आप (मिर्जा राजा जयसिंह) जैसे शुभचिन्तक व भरोसेमन्द के कठिन परिश्रम के फलस्वरूप शिवाजी को पकड़कर शाही दरबार में भेजा गया था। हमने कुंवर रामसिंह को विश्वसनीय एवं शुभचिंतक समझकर शिवाजी को उसके हवाले कर दिया था। कुंवर रामसिंह भलमानसी तथा सेवगी से हटकर शिवाजी के फरार होने का मार्ग सरल करके धोखाधड़ी से उसे वहां से फरार करवा दिया।

मेरी इच्छा है कि इस गलती की सजा में कुंवर रामसिंह की खाल खिंचवाकर शहर में घुमावें लेकिन, वह आपका पुत्र है। आप हमारे दरबार के विश्वासपात्र मनसबदार है, आपके कारण उसको जीवनदान दिया जा रहा है। सिर्फ मनसब से पदच्युत किया गया है। आपको अपने पुत्र को इतनी थोड़ी सी सजा दिए जाने पर खुदा का शुक्र अदा किया जाना चाहिए। इससे शिवाजी के आगरा से भागने में मिर्जा राजा जयसिंह व रामसिंह की स्पष्ट भूमिका का पता चलता है।