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आमतौर पर लोग सोना-चांदी खरीदने के लिए सुनार की दुकानों के अंदर जाते है लेकिन कुछ महिलाएं सोना-चांदी के लिए सुनार की दुकान के बाहर ही सोना व चांदी ले लेते है। शहर में कई इलाकों में कुछ महिलाओं को गंदे पानी की नालियों के पास छजला व झाडु लेकर गंदे पानी में कुछ तलाशते देखा होगा।
एेसे दृश्य खासतौर पर एेसे इलाकों में ज्यादा देखने को मिलते हैं, जहां घरों में सोने-चांदी के गहने बनाने का काम होता हो अथवा आस-पास में सोने-चांदी के गहने और बर्तन बनाने की दुकान अथवा वर्कशॉप हो। यह महिलाएं ऊपरी सतह से आने वाली नालियों के निचली सतह पर बैठकर इन क्षेत्रों से आने वाले गंदे पानी में बारीकी से हर चीज को देखती है।
यह महिलाएं उस गंदे पानी में ही सोने और चांदी के बारीक से बारीक कणों को खोजने के लिए घंटों उस गंदे पानी में छाजला, झाडु और हाथों की मदद से उसको निकार कर देखती हैं कि कहीं सोने का कुछ अंश अथवा टुकड़ा मिल जाए।
कई बार तो थोड़ी देर में ही इनकी मनवांछित आशा पूरी हो जाती है तो कई बार सोने के इन बारीक कणों के लिए इंतजार में घंटों उथल-पुथल करती रहती है लेकिन कुछ भी नहीं मिलता है। बीकानेर में जेलवेल रोड़, सुनारों का मौहल्ला, कोतवाली थाने के पास आदि कई जगहों पर यह महिलाएं नाले में से रोजाना करीब 30 से 40 हजार रूपए के सोना व चांदी निकालती है।
रोजाना मिलते है 500 से 1000
यह महिलाएं नालियों में से करीब 500 से 1000 रूपए का सोना रोजाना निकालती हैं। सुबह 4 से 11 बजे तक यह महिलाएं यहां बैठी रहती हैं। रोजाना इनको सोना 20 ग्राम या उससे ज्यादा ही मिल जाता है। कई जगहों पर करीब 50 से अधिक महिलाएं इस सोने व चांदी की तलाश में काम करती है।
एेसे जाता है नालियों में सोना व चांदी
सोने व चांदी का काम करने वाले दुकानदार एवं कारीगर जब कार्य करते हैं और तो सोने व चांदी के छोटे-छोटे अंश इधर-उधर बिखर जाते है। सफाई के बाद यह कचरा नालियों में चला जाता है।
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