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आयकर विभाग के सर्वे में हुआ ज्वेलर्स का खुलासा

आयकर विभाग के सर्वे में हुआ चार करोड़ की अघोषित आय का खुलासा

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Income tax department

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आयकर विभाग के सर्वे में तीन ज्वेलर्स के ठिकानों पर करीब चार करोड़ रुपए की अघोषित आय का खुलासा हुआ है। इनके यहां गुरुवार को एक साथ सर्वे की कार्रवाई शुरू की थी। तीनों ठिकानों पर आयकर विभाग को कई चौंकाने वाले तथ्य मिले हैं, जिनकी जांच की जा रही है।

विभाग के प्रधान आयकर आयुक्त आरएस मीना ने बताया कि खजांची मार्केट के दो तथा तेलीवाड़ा स्थित एक ज्वेलर्स के यहां गुरुवार शाम करीब पांच बजे सर्वे की कार्रवाई को अंजाम दिया गया था।

मीना के अनुसार तीनों ही स्थानों पर जांच के दौरान गंभीर अनियमितताएं उजागर हुई है। इनके यहां से जब्त किए दस्तावेज की जांच का कार्य सर्वे के बाद भी जारी रखा जाएगा।

नजर में रहेंगे प्रतिष्ठान

आयकर विभाग के सूत्रों की मानें तो विभाग ने एक टीम का गठन किया है, जो आभूषणों की खरीद, महंगी कारें, जमीनों के सौदे करने सहित करोड़ों रुपए के गोपनीय सौदे करने वालों पर नजर रखेगी।

विभाग की ओर से गठित टीम के बारे में आयकर विभाग के प्रधान आयकर आयुक्त मीना से पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि विभाग की कार्य प्रणाली का यह हिस्सा है। उन्होंने कहा कि आय के अनुरूप विभाग को टैक्स अदा नहीं करने वालों के खिलाफ जल्द ही फिर बड़ी कार्रवाई की जा सकती है।

नोटबंदी की अवधि पर रहा फोकस

जांच के दौरान आयकर विभाग के निरीक्षकों ने नोटबंदी की समयावधि में तीनों ज्वेलर्स द्वारा किए गए व्यापारिक सौदों पर फोकस रखा। सूत्रों के अनुसार नोटबंदी के दौरान अधिकतर ज्वेलर्स ने कागजी सौदे किए हैं। तीनों ठिकानों में से कुछ ठिकानों पर जांच के दौरान कुछ इसी तरह के संकेत भी मिले हैं।

हालांकि इस संबंध में आयकर विभाग के अधिकारियों ने कुछ भी बताने से इंकार कर दिया। ज्ञात हो कि नोटबंदी की अवधि समाप्त होने के साथ ही आयकर विभाग ने अपनी सर्वे की कार्रवाई को एक बार फिर शुरू कर दिया है।

इधर खोली हजार खातों की कुण्डली

आयकर विभाग ने सर्वे का कार्य शुरू करने के साथ ही करीब एक हजार खातों की कुण्डली खोल ली है। जिन खातों को जांच में शामिल किया गया है, उनमें अधिकतर बेनामी संपत्ति, कर चोरी तथा सर्वे से जुड़े हुए हैं।

विभाग के प्रधान आयकर आयुक्त आर.एस. मीना ने बताया कि वर्षों पुराने प्रकरणों को जांच में शामिल किया गया है। इन्हें पूर्व में नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन इन्होंने कभी विभाग का रुख नहीं किया।

मीना के अनुसार अधिकतर प्रकरण वे हैं, जिनके यहां पूर्व में बेनामी सम्पत्ति तथा अघोषित आय से जुड़े प्रकरण लंबित चल रहे हैं।

चपेट में आ सकते हैं अधिकारी

आयकर विभाग के सूत्रों की मानें तो एक हजार खातों में प्रोपट्री डीलर, कारोबारी, सर्राफा व्यापारियों सहित कई राजकीय अधिकारी भी चपेट में आ सकते हैं।

अधिकारियों के अनुसार उनके पास मुख्यालय से करीब पांच हजार खातों की जानकारी मिली थी, जिनमें अधिकतर खातों का निपटारा कर दिया गया था।

अधिकारियों के अनुसार संबंधित व्यक्तियों ने जमीनों के सौदे, रजिस्ट्रियां, आलीशान मकान सहित कई महंगे खर्च किए थे, लेकिन आयकर विभाग को उसके अनुरूप टैक्स अदा नहीं किया।

खातों को खोलने से पहले आयकर विभाग की टीम ने संबंधित कारोबारियों और अधिकारियों के ठिकानों की तस्दीक कर ली है, ताकि भविष्य में सर्वे या छापे जैसी कार्रवाई को अंजाम दिया जा सके।

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