
स्वतंत्रता दिवस विशेष: प्रथम स्वतंत्रा संग्राम के सेनानी तात्यां टोपे आए थे बीकानेर
दिनेश स्वामी
बीकानेर. प्रथम स्वतंत्रता संग्राम और 1857 की क्रांति के दौरान सेनानी तात्यां टोपे के राजस्थान में टोंक, बूंदी और भीलवाड़ा में आने का उल्लेख तो इतिहास में मिलता है लेकिन, बीकानेर का नहीं। जबकि तात्यां टोपे बीकानेर में भी आए थे, इसका उल्लेख राज्य अभिलेखागार में सुरक्षित रखे दस्तावेजों में दर्ज है। उनके 8 मार्च 1858 शनिवार के दिन बीकानेर इलाके में होने की सूचना अंग्रेजों को मिली थी।
बीकानेर में स्वतंत्रता संग्राम से संबंधित इस बात का खुलासा उस समय प्रकाशित समाचारों पत्रों ने किया था। तात्यां टोपे से जुड़े संरक्षित दस्तावेज लिखा है कि हिन्दुस्तानी समाचारों से जाना गया कि तात्यां टोपे राव साहब के लश्कर, जो बीकानेर के इलाके में वेदवाड़ स्थान पर है। तात्यां टोपे के साथ घोड़े से बागियों के सरदार और 200 मनुष्यों के होने का अनुमान है। उसी एेसी इच्छा जान पड़ती है कि सेघिया के देश में होकर बुदेलखंड व जालोन में छुप जाए। सरकारी बलवान उसे शीघ्र जिंदा पकड़कर सरकार के अधीन करेंगे।
असल में इतिहास में तात्यां टोपे के राजस्थान में आगे बढ़कर उदयपुर और जयपुर में कब्जा करने का इरादा था। लेकिन अंग्रेज अफसर जरनल रॉबर्ट यहां पहले पहुंच गए। एेसे में तात्यां टोपे को वापस लौटना पड़ा। आगरा से उस समय प्रकाशित सूर्यप्रकाश समाचार पत्र के ५ मार्च १८५९ के अंक की प्रति को भी अभिलेखागार में सुरक्षित रखा हुआ है। इसमें तात्यां टोपे के बीकानेर इलाके में होने की सूचना का उल्लेख मिलता है।
विदेशी सरकार के खिलाफ युद्ध अपराध नहीं
अभिलेखागार के दस्तावेज में लिखा है कि सन 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के प्रसिद्ध सेनानी रामचंद्र पांडुरंग (तात्या टोपे) नाना साहब के निकट सहयोगी थे। अपने अल्प साधनों और छापामार युद्ध प्रणाली से तात्यां टोपे ने लम्बे समय तक ब्रिटिश हकुमत को चुनौती दी। इसी क्रम में तात्यां टोपे राजपुताना भी आए। अंत में अपने मित्र के विश्वासघात के कारण पकड़े गए। सीपरी छावनी में सुनवाई के दौरान तात्यां टोपे ने कहा 'विदेशी सरकार के विरूद्ध युद्ध करना अपराध नहीं है।
बही में इनाम घोषित का उल्लेख
कागद बही बीकानेर मिति कार्तिक सुदी ९ सं. १९१५ में दर्ज है कि अंग्रेजी सरकार के विद्रोही, पेशवा के सामर्थक तात्यां टोपे औरे राव साहब के भतीेजों के विषय में सूचना देने वाले को अंग्रेजी सरकार की ओर से 10 हजार रुपए का पुरस्कार मिलेगा। गांवों के जागीरदार, चीरा एवं सरदारों के गांवों को परिपत्र देने का आदेश दिया गया कि अंग्रेजी सरकार का कोई भी विद्रोही उनके क्षेत्र में आए तो उसे तुरंत गिरफ्तार कर लिया जाए।
नाना साहब को पकडऩे पर ५० हजार पुरस्कार
कागद बही नम्बर ६३, बीकानेर मिति पोष सुदी १ सं. १९१४ में दर्ज है कि कानपुर के बिठुर जिले के रईस नाना साहब को पकड़कर लाने या पकडऩे में सहयोग करने पर 50 हजार रुपए का पुरस्कार अंग्रेजी सरकार देगी। साथ ही कत्ल के अतिरिक्त अन्य जुर्म को क्षमा करने का उल्लेख किया गया है।
अग्रस्त क्रांति प्रदर्शनी में डिस्पले
राज्य अभिलेखागार के निदेशक डॉ. महेन्द्र खडग़ावत के अनुसार अगस्त क्रांति के कार्यक्रमों की शृंखला में अभिलेखागार में स्वतंत्रता सेनानियों से जुड़ी प्रदर्शनी लगाई गई है। इसमें तात्यां टोपे के बीकानेर आने और 1857 की क्रांति में राजपुताना का योगदान दर्शाया गया है। इसमें आउवा ठाकुर कुशला उर्फ कुशाल सिंह चांपावत के ब्रिटिश सत्ता से लोहा लेेकर आउवा की पराक्रम एवं बलिदान की गाथा का दस्तावेज के साथ प्रदर्शन किया गया है।
Published on:
15 Aug 2020 01:05 am

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