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अंतर्राष्ट्रीय ऊंट उत्सव – ऊंट नृत्य व करतब देख हर कोई हुआ आकर्षित

International Camel Festival 2020

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अंतर्राष्ट्रीय ऊंट उत्सव - ऊंट नृत्य व करतब देख हर कोई हुआ आकर्षित

अंतर्राष्ट्रीय ऊंट उत्सव - ऊंट नृत्य व करतब देख हर कोई हुआ आकर्षित

बीकानेर. संगीत की कोई भाषा नहीं होती, अगर म्यूजिक राजस्थानी भी है, तो भी उत्तर प्रदेश पंजाब और गुजरात से आए कलाकारों के साथ-साथ विदेशी सैलानियों के पांव थिरकेंगे। म्यूजिक का जादू सर चढ़कर बोलता है, ऐसा सुना था। मगर आज डाॅ. करणी सिंह स्टेडियम में अंतरराष्ट्रीय विश्व में जब राजस्थानी गीत संगीत की मधुर स्वर लहरियां गूंज रही थी तो हर दर्शक अपने पांव थिरकाते हुए नाच रहा था। देसी-विदेशी सैलानियों की तो बात ही छोडं,़े जिसके नाम पर यह उत्सव था, वह ऊंट भी म्यूजिक पर इस तरह नाच रहा था, मानो यह म्यूजिक की भाषा ही समझता है।

शनिवार को डाॅ. करणी सिंह स्टेडियम में कला संस्कृति के साथ-साथ एक बात यह भी बहुत स्पष्ट हो गई कि संगीत सिर्फ संगीत होता है और वह कर्णप्रिय होता है। जैसे ही कानों से दिमाग तक संगीत जाता है, व्यक्ति स्वतः ही थिरकने लगता है।


सताईसवां अन्तरराष्ट्रीय ऊंट उत्सव शनिवार को डाॅ.करणी सिंह स्टेडियम में रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, ऊंट की उपयोगिता को उजागर करने वाले कार्यक्रमों, ऊंट के करतबों व नृृत्यों, चिताकर्षक शोभायात्रा से शुरू हुआ। जिला प्रशासन व पर्यटन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस उत्सव का शुभारंभ जिला कलक्टर कुमार पाल गौतम, बीएसएफ के मेजर जनरल जे.एस.नंदा, पुलिस अधीक्षक प्रदीप मोहन शर्मा ने तिरंगे गुब्बारे तथा शांति व एकता के प्रतीक सफेद कपोत उड़ाकर किया।


उद्घाटन अवसर पर कलक्टर ने कहा कि राज्य पशु ऊंट लगभग 3500 साल से अधिक समय से पालतू पशु के रूप में मानव सभ्यता का अभिन्न अंग रहा है। मरु प्रदेश राजस्थान के लोगों का रेगिस्तानी जहाज ऊंट साथी, सहयोगी व उपयोगी पशु रहा है। चालीस किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ने वाला ऊंट परिवहन, खेती के साथ राजस्थानी संस्कृति का एक प्रमुख हिस्सा रहा है। कार्यक्रम का संचालन करते हुए रवीन्द्र हर्ष, संजय पुरोहित, ज्योति प्रकाश रंगा व किशोर सिंह राजपुरोहित ने बीकानेर के सांस्कृृतिक महत्व, ऊंट के महत्व को उजागर किया ।

शोभायात्रा- जूनागढ़ किला से रवाना होकर डाॅ. करणी सिंह स्टेडियम पहुंची शोभायात्रा के कलाकारों ने भी लोगों का दिल जीत लिया। शोभायात्रा को जिला कलक्टर कुमार पाल गौतम और पुलिस अधीक्षक प्रदीप मोहन शर्मा ने ध्वज दिखाकर रवाना किया। शेाभायात्रा में बड़ी संख्या में राजस्थानी वेशभूषा में छात्राएं मंगलकलश लिए चल रही थीं। वहीं ऊंटों पर बैठे रोबीले और ऊंट गाड़ों पर बैठे विश्व भर से आए सैलानी भी आकर्षण का केन्द्र रहे। शोभायात्रा में ऊंटों का काफिला और अश्व दल भी शामिल थे। राजस्थानी लोक अंचलों से आए कलाकार गींदड़, डांडिया नृत्य, आदिवासी मयूर नृत्य, कालबेलिया नृत्य, चंग के साथ नृत्य, नख से शिख तक श्रंृगारित ऊंट, सफेद घोड़ी नृत्य करते हुए, फर कटिंग किए हुए अपने शरीर पर बेलबूटे, देवी-देवताओं के चित्र उकेरे ऊंट, कलश लिए राजस्थानी वेशभूषा में युवतियां, बुलेट मोटर साइकिल पर सवार युवक राष्ट्रीय ध्वज लिए हुए थे। शोभायात्रा में अफ्रीकी देश का नृत्य भी प्रस्तुत किया गया, जिसे लोगों ने खूब सराहा।

इस दौरान ऊंट गाड़ों पर ऊंट की महत्ता को बताया गया कि वर्षों पहले किस तरह रेगिस्तान के इस जहाज का बहु-उपयोग होता था। ऊंट गाड़ों में बैठे सैलानी ये दर्शा रहे थे कि वे मेले के लिए प्रस्थान कर रहे हैं, तो वहीं अन्य ऊंट गाड़ों में निर्माण सामग्री और किसी अन्य में पानी के परिवहन को दर्शाते ऊंट गाड़े भी लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहे थे। वहीं ऊंट की उपयोगिता को दर्शाने वाले ऊंट गाड़े, एस.बी.आई की ओर से ऊंट गाड़े पर लगाया गया विदेशी विनिमय बैंक, रियासतकालीन गंगा रिसाले के प्रतीक पहरेदार तथा राजस्थानी वेशभूषा में रण बांकुरे शामिल थे। पुष्कर के अशोक टाॅक ने ऊंट के गहनों व विशिष्टताओं का प्रदर्शन किया। आस्टेªलिया के ऊंट पालक कैरन एलिस तीन साल से उत्सव में आ रहे हैं। वे 150 किलोमीटर की ऊंट की सवारी करते हुए बीकानेर पहुंचे थे।

ऊंट नृत्य-

उत्सव के दौरान दो दर्जन सजे संवरे ऊंटों ने अपने पैरों में बंधे हुए नेवरी, घुंघरू और पायल की मधुर ध्वनियों के साथ ढोल व लोकसंगीत की स्वर लहरियों पर नृत्य किया, साथ ही लोहे के दो ढोलियों (पलंगों), लकड़ी के तख्त पर भी नृत्य किया। ऊंटों ने नृत्य के दौरान मुंह में दो जलते अंगारे, पानी से भरी बाल्टी और केतली उठाकर, दो टांगों को अपने कद से ऊंचा उठाकर पर्यटकों को रोमांचित कर करतल ध्वनि के लिए मजबूर कर दिया। पर्यटकों के साथ देश-विदेश के मीडियाकर्मियों ने ऊंट के करतब व नृत्यों को अपने कैमरों में कैद किया।


मिस मरवण व मिस्टर बीकाणा-

उत्सव के प्रथम दिन मिस मरवण व मिस्टर बीकाणा प्रतियोगिता आयोजित की गई। प्रतियोगिताओं के दौरान राजस्थानी ठेठ ग्रामीण वेशभूषा में रोबिले, विभिन्न तरह की पोशाकों में युवतियों ने हिस्सा लिया। प्रतियोगियों को बीकानेर की स्थापना, देवी करणीमाता का पूर्व नाम, बीकानेर की कला व संस्कृति सहित विविध प्रश्न निर्णायकों ने पूछे । कई प्रतिभागियों ने राजस्थानी कविता, मुहावरों के साथ अतिथियों का अभिनंदन किया। दोनों प्रतियोगिताओं के परिणाम रविवार को जारी किए जाएंगे। मिस मरवण प्रतियोगिता में बाल मेहमान कलाकार के रूप में सौम्या सोनी ने लोकनृत्य किया।


हैरिटेज वाक व ऊंट दौड़ सहित विविध कार्यक्रम आज-

ऊंट उत्सव के दूसरे दिन रविवार को सुबह नौ बजे से ग्यारह बजे तक रामपुरिया की हवेलियों से लक्ष्मीनाथ मंदिर तक हैरिटेज वाॅक का आयोजन होगा। जिसमें स्थानीय लोग, कलाकार तथा बड़ी संख्या में देशी विदेशी पर्यटक शामिल होंगे। दोपहर ग्यारह बजे से साढ़े बारह बजे तक ऊंट अनुधान केन्द्र में ऊंट दौड़, उसके बाद दोपहर साढ़े बारह बजे से डेढ़ बजे तक घुड़ दौड़, डाॅ.करणी सिंह स्टेडियम में रस्सा कस्सी, कुस्ती, मटका दौड़ के आयोजन दोपहर दो बजे से पांच बजे तक होगा। शाम पांच बजे ऊंट नृत्य, उसके बाद साफा बांधने की प्रतियोगिता, राजस्थान व विभिन्न अंचलों के कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, अग्नि नृत्य, व आतिशबाजी का आयेाजन होगा।

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