बच्चों से बुजुर्गो तक ने हाथों में लाठियां लेकर अधर्म के प्रतीक रूप में कंस का वध किया। बीकानेर में जन्माष्टमी के दिन पानी की मटकी पर तालाब की मिट्टी से कंस की अनुकृति बनाने की दशकों पुरानी परम्म्ंपरा है। गली-मोहल्लों से मंदिरों तक कंस बनाए जाते है। कई स्थानों पर कपड़ों से कंस के हाथ और पैर भी बनाए जाते है। मिट्टी से कंस के दो सिंग, मुकुट, तिलक, नाक, मूंछ, मुंह, कान बनाए जाते है।