
भूमि आवंटन घोटाला: 53 साल पुराने फर्जी पट्टों से भूमि आवंटन घोटाले को दिया अंजाम
एक तरफ बीकानेर-जैसलमेर जिले के 75 हजार से ज्यादा भूमिहीन खाली पड़ी हजारों एकड़ रकबा राज भूमि पर खेती कर रोजी-रोटी के लिए जमीन आवंटन का इंतजार कर रहे हैं।
वहीं दूसरी ओर भूमाफिया इसमें से सैकड़ों एकड़ भूमि पर फर्जी कागजात से अपने नाम इंतकाल दर्ज करवा कब्जे कर चुके हैं। दरअसल, 24 साल पहले सरकार ने आवंटन के लिए उपनिवेशन के माध्यम से भूमिहीनों से 58 हजार और विशेष आवंटन के 17 हजार आवेदन लिए थे, जो आज भी सरकारी बस्तों में धूल फांक रहे हैं।
ताजा सामने आए छत्तरगढ़ तहसील के भूमि आवंटन घोटाले में भूमाफिया ने तहसील, उपखण्ड कार्यालय से लेकर जिला मुख्यालय के रेकॉर्ड रूम तक सेंध लगाई थी। वर्ष 1971 के जारी पट्टों के फर्जी कागजात तैयार किए।
उपखण्ड अधिकारी के यहां अपील की और तहसीलदारों और पटवारियों से मिलकर इंतकाल अपने नाम चढ़वा लिए। छत्तरगढ़ में खुले फर्जीवाड़ा में 6 हजार 125 बीघा रकबा का फर्जी इंतकाल दर्ज हुआ है। जबकि खाजूवाला उपखण्ड के पूगल और दंतौर क्षेत्र में भी हजारों बीघा जमीन इसी पैटर्न पर दर्ज की गई। इसका रिकॉर्ड जिला कलक्टर ने पिछले साल सील किया था, परन्तु आज तक जांच सिरे नहीं चढ़ी है।
यों दिया घोटाले का अंजाम
राजस्थान पत्रिका के हाथ लगे इस घोटाले से जुड़े 16 जुलाई 1971 के कृषि प्रयोजनार्थ आवंटन पत्र (पट्टे) से इस पूरे खेल का पता चलता है। यह आवंटन पत्र उपखण्ड अधिकारी बीकानेर उत्तर/दक्षिण का जारी किया दर्शाया गया है। इसकी प्रमाणित प्रतिलिपि 13 सितम्बर 2022 को रेकॉर्ड रूम से लेना भी दर्ज है। इसके बाद इस फर्जी आवंटन पत्र के आधार पर इंतकाल दर्ज कर दिया गया। इसके आदेश तहसीलदार से जारी हुए और पटवारी ने आगे की कार्रवाई की।
पूरी प्रक्रिया ही माफिया के कब्जे में
हैरानी की बात यह भी है कि पचास-साठ साल पुराने कागज के आधार पर भूमि का मालिकाना हक किसी को दिया जाता है तो उसके रेकॉर्ड का मिलान किया जाता है। यह रेकॉर्ड जिला मुख्यालय के रेकॉर्ड में है। यहां से प्रमाणित होने के बाद ही उसके नाम भूमि दर्ज की जाती है। भूमाफिया ने उपखण्ड और तहसील से लेकर फर्जी आवंटन पत्रों का रेकॉर्ड सत्यापन कराने तक की प्रक्रिया को अपने कब्जे में ले लिया।
4 बिंदुओं में समझें इस पूरे फर्जीवाड़े को
1- 1971 में भूमिहीनों को खेती प्रयोजनार्थ जमीन के आवंटन पत्र जारी किए गए थे। इसमें सैकड़ों आवंटियों को आज तक पता ही नहीं है कि उनके नाम से कोई भूमि आवंटित हुई। भूमाफिया उस समय के फर्जी आवंटन पत्र या असली आवंटी की जगह फर्जी के नाम जमीन चढ़वा रहे हैं।2- 1984 और 2001 में सरकार ने भूमिहीनों को सरकारी भूमि आवंटित करने के लिए आवेदन लिए थे। जो करीब 75 हजार से ज्यादा आज भी लम्बित पड़े हैं। उस समय उपनिवेशन क्षेत्र में 14 हजार हैक्टेयर सरकारी भूमि उपलब्ध थी, जबकि सभी आवंटियों के लिए 22 हजार हैक्टेयर की जरूरत थी।
3- 6 हजार बीघा से ज्यादा जमीन पिछले पांच साल में पुराने आवंटन पत्रों के आधार पर भूमाफिया ने अपने नाम चढ़वा ली। जबकि उपनिवेशन ने 35 साल पहले बीकानेर जिले में 12 हजार हैक्टेयर सरकारी भूमि राजस्व तहसीलों के सुपुर्द की थी।4- 10 लाख रुपए प्रति मुरब्बा तक सोलर प्लांटों के लिए कम्पनियां भूमि खरीद रही है। जबकि ये जमीनें पहले दो-तीन लाख रुपए मुरब्बा के रेट पर भी कोई लेने को तैयार नहीं होता था।
अधिकारियों पर कार्रवाई की गेंद सरकार के पाले में
आवंटन घोटाले में सेवानिवृत हो चुके एक तहसीलदार, तीन मौजूदा तहसीलदार, दो नायब तहसीलदारों को निलम्बित करने के लिए बीकानेर जिला कलक्टर राज्य सरकार को रिपोर्ट भेज चुकी है। इन पर कार्रवाई अब राज्य सरकार के स्तर पर तय की जानी है।
Published on:
15 Mar 2024 02:13 pm

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