
बीकानेर. बज्जू रेतीले और तेंदुओं के लिए प्रतिकूल माने जाने वाले बीकानेर जिले में एक बार फिर तेंदुए की मौजूदगी ने वन विभाग और पर्यावरणविदों के सामने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। एक दिन पहले बॉर्डर क्षेत्र के बज्जू में मृत तेंदुआ मिलने के बाद इसके यहां तक पहुंचने के कारणों को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। एक साल के भीतर जिले में दूसरी बार तेंदुए के आने की पुष्टि हुई है, जिससे इसे सामान्य घटना नहीं माना जा रहा।
अरावली से भटककर आने की आशंकावन विभाग के अनुसार, तेंदुआ अरावली पर्वत श्रृंखला या लेपर्ड कंजर्वेशन क्षेत्रों से भटककर यहां पहुंचा हो सकता है। प्रदेश में पाली के जमाई बांध, जयपुर के झालाना और अरावली क्षेत्र तेंदुओं के प्रमुख आवास हैं। ये अक्सर भोजन या सुरक्षित क्षेत्र की तलाश में लंबी दूरी तय करते हुए नए इलाकों में पहुंच जाते हैं।
वन विभाग के रेंजर वाई.एस. राठौड़ के अनुसार तेंदुआ सामान्य परिस्थितियों में इंसानों पर हमला नहीं करता। भूख, प्यास या घबराहट में आक्रामक हो सकता है। प्रतिकूल माहौल मिलने पर झपटा मारने की घटनाएं होती हैं। बरसलपुर क्षेत्र में किसानों पर हमले की आशंका भी इसी वजह से जोड़ी जा रही है।
तेंदुए की मूवमेंट को लेकर विशेषज्ञ बताते हैं कि यह रात में सक्रिय रहता है, दिन में छिप जाता है। एक रात में 80-100 किमी तक दूरी तय कर सकता है। खुले और रेतीले क्षेत्र में पहुंचने पर असहज हो जाता है। बीकानेर के बाद बॉर्डर क्षेत्र का खुला इलाका इसके लिए और चुनौतीपूर्ण साबित होता है।
हाल के महीनों में तेंदुए की गतिविधियां लगातार ट्रैक हो रही हैं। दिसंबर 2025 में चूरू में पहली बार देखा गया।गत 13 जनवरी को मोलीसर छोटा (चूरू) में ट्रेंकुलाइज किया गया। इसके बाद श्रीडूंगरगढ़, छतरगढ़ और दंतौर में पगमार्क देखे गए। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह मूवमेंट अरावली से निकलकर उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ने का संकेत है।
फसल क्षेत्रों में लगातार हरियाली और जल स्रोत होने के कारण तेंदुए खेतों के रास्ते आगे बढ़ते रहते हैं। शिकार की तलाश में गांवों के नजदीक पहुंचते हैं। खेतों में छिपकर आगे बढ़ना आसान होता है। इसी कारण यह बीकानेर जैसे क्षेत्र तक पहुंच गया।
बज्जू के बरसलपुर ग्राम पंचायत क्षेत्र में मृत मिले तेंदुए का मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम कराया गया है। बाहरी चोट के निशान नहीं मिले हैं। प्रारंभिक आशंका है कि भूख, प्यास या घबराहट से मौत हुई। रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के कारण स्पष्ट होंगे।
वन विभाग की टीम ने इलाके में सर्च अभियान शुरू कर दिया है। यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि आसपास कोई अन्य तेंदुआ तो नहीं है। ग्रामीणों को सतर्क रहने और अकेले खेतों में न जाने की हिदायत दी गई है। विशेषज्ञ इस घटना को केवल ‘भटका हुआ तेंदुआ’ नहीं मान रहे, बल्कि इसे पारिस्थितिक असंतुलन का संकेत भी मान रहे हैं। वन क्षेत्रों में दबाव, शिकार की कमी और आवासीय दखल जैसे कारण वन्यजीवों को नए इलाकों की ओर धकेल रहे हैं।
Published on:
30 Mar 2026 06:19 pm
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