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राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से पहले राजस्थान में यहां पहुंचे हजारों की संख्या में गरुड़ और जटायु

रामायण में गरुड़ पक्षी के भगवान राम को नागपाश से मुक्त कराने और प्राणों की आहुति देकर श्रीराम की मदद करने वाले जटायु पक्षी का उल्लेख मिलता है। पौराणिक मान्यताओं वाले इन दोनों पक्षियों की प्रजातियों के दस हजार से ज्यादा पक्षी इन दिनों जोड़बीड़ में डेरा डाले हुए हैं।

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दिनेश कुमार स्वामी

रामायण में गरुड़ पक्षी के भगवान राम को नागपाश से मुक्त कराने और प्राणों की आहुति देकर श्रीराम की मदद करने वाले जटायु पक्षी का उल्लेख मिलता है। पौराणिक मान्यताओं वाले इन दोनों पक्षियों की प्रजातियों के दस हजार से ज्यादा पक्षी इन दिनों जोड़बीड़ में डेरा डाले हुए हैं। इनमें जटायु के पहली बार इतनी बड़ी तादाद में आने से पक्षी प्रेमी भी आश्चर्यचकित हैं। जोड़ बीड़ रिजर्व कंजर्वेटिव क्षेत्र मृत पशुओं को डालने वाली एशिया की सबसे बड़ी डम्पिंग साइट है। इसके जंगल में जहरीले सांप, चूहे आदि बड़ी तादाद में होने से शिकारी पक्षी चील व बाज आदि भी यहां खूब आते हैं।

तीन हजार किमी का सफर तय कर आते हैं
तीन हजार किलोमीटर का फासला तय कर कजाकिस्तान, मंगोलिया और रूस आदि से आने वाले इन पक्षियों में सबसे ज्यादा तादाद गिद्धों की है। गिद्ध कभी शिकार नहीं करता। यह मृत पशुओं के मांस को खाता है। जटायु प्रजाति का दुनिया का सबसे बड़ा और भारी पक्षी सिनेरियस वल्चर भी करीब 100 की संख्या में आए हुए हैं। इनकी इतनी बड़ी तादाद पहली बार देखने को मिली है। इसी के साथ गरुड़ प्रजाति की ईस्टर्न इम्पीरियल ईगल करीब 80 की तादाद में पहुंची हैं। यह बेहद ही खूबसूरत चील मानी जाती है।

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वाइड लाइफ फोटोग्राफर राकेश शर्मा सालों से जोड़बीड़ में पक्षियों पर नजर रख रहे हैं। उन्होंने इस बार 10 से ज्यादा प्रजातियों के गिद्ध, बाज, चील को ट्रैक किया है। शर्मा के मुताबिक भारतीय प्रजाति के गिद्ध इंडियन वल्चर, रेड हेड वल्चर, व्हाइट हम्ड वल्चर, लॉन्ग बिलेड वल्चर जोड़बीड़ में दिखते थे। गिद्धों के लुप्त होने के बाद अब विदेशी प्रजाति के गिद्धों इंजेप्शियन वल्चर (सफेद गिद्ध) आदि ने यहां की अनुकूलता में खुद को ढालना शुरू कर दिया है। अब यह स्थाई रूप से रहने लगे हैं।

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