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बीकानेर. खेल के दम पर रोजगार पाना आज चुनौती बन गया है। ऐसे में साइक्लिंग खेल ने रोजगार की उम्मीद जगा रखी है। खासकर इस खेल के जरिए रेलवे ने युवाओं को नौकरी का अवसर दिया है। बीकानेर के कई होनहार साइक्लिस्ट रेलवे में काम कर रहे हैं। दो साल में बीकानेर के करीब आधा दर्जन युवा साइक्लिस्टों को रेलवे की नौकरी मिली है। इसमें कुछ बीकानेर मंडल में ही कार्यरत हैं, तो कुछ पूर्वोत्तर रेलवे में नौकरी कर रहे हैं।
रेलवे में फुटबॉल को छोड़कर अन्य खेलों की भर्ती ही होती है। मुख्यालय ने ग्रुप डी में फुटबॉल खेल का कोटा ही बंद कर रखा है। इसके पीछे कारण उम्दा प्रदर्शन नहीं होना माना जा रहा है। नई भर्ती नहीं होने से खिलाडिय़ों का टोटा है। रेलवे में ग्रुप सी में ही खेल कोटे की भर्ती की जा रही है। इसमें भी महज उस फुटबॉल प्लेयर को ही नौकरी मिल सकती है, जो राष्ट्रीय स्तर पर उम्दा खेल का प्रदर्शन कर चुका हो।
प्रत्येक जोन में 25 सीटें
भारतीय रेलवे के 16 जोन हैं। अभी प्रत्येक जोन में 2५ सीटें खेल कोटे की है। इसमें किसी भी खेल के योग्य खिलाड़ी को मौका मिल सकता है। रेल मंडल खेलकूद संघ के सचिव ओमप्रकाश जाट की मानें तो बीकानेर में फुटबॉल खिलाडिय़ों को एक अच्छा प्लेटफार्म, उम्दा
कोच मिले, तो यहां की प्रतिभाएं सामने आएंगी।
योग्य खिलाडि़यों को मौका
रेलवे में ग्रुप सी में खेल कोटा है। इसके माध्यम से नौकरी पा सकते हैं। देशभर में रेलवे में जोनवार खेल कोटा है। योग्यताधारी खिलाडिय़ों को मौका भी मिल रहा है।
नील महला, रेल मंडल खेलकूद अधिकारी, बीकानेर
Published on:
15 Oct 2018 11:12 am
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