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कालिका माता के नाम पर पड़ा इस गांव का नाम

आस्था का केंद्र है कालू का कालिका देवी मंदिर

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कालिका माता के नाम पर पड़ा इस गांव का नाम

कालिका माता के नाम पर पड़ा इस गांव का नाम

कालू. बीकानेर जिले से 90 किलोमीटर दूर लूणकरणसर तहसील के कालू गांव स्थित कालिका माता का मंदिर आस्था का केंद्र है। कालू गांव को कालिका का खेड़ा माना जाता है। यही कारण है कि प्रत्येक शुभ कार्य शुरू करने से पहले मां कालिका को अवश्य याद किया जाता है।


ऐसा माना जाता है कि कालू गांव का नाम भी कालिका माता के नाम पर ही पड़ा है। कालिका माता की उत्पत्ति के संबंध में ऐसा माना जाता है कि कालिका माता का अवतरण जमीन से हुआ है तथा माता की देवली की उत्पत्ति के बाद ही यहां धीरे-धीरे गांव बसा तथा अन्य सुख सुविधाएं हुई। देवली के अवतरण के बाद से यहां पूजा-अर्चना होने लगी थी। तब से लेकर आज तक कालिका माता का मंदिर ग्रामीणों की अगाध श्रद्धा का केंद्र बना है।


वर्तमान में कालू में कालिका माता का भव्य मंदिर बना है, मंदिर में कालिका माता एवं ब्रह्माणी माता के मंदिर बने हुए हैं। मंदिर में प्रवेश से पूर्व दोनों तरफ काला भैरव व गोरा भैरव के मंदिर बने हैं। कस्बे के भादू परिवार की ओरसे मंदिर की सेवा पूजा की जाती है। मंदिर के पास ही जगदंबा यात्री निवास का निर्माण करवाया गया है, ताकि बाहर से आने वाले भक्तों को कोई परेशानी ना हो। मंदिर की व्यवस्थाओं के लिए श्रीजगदंबा ट्रस्ट का गठन किया हुआ है, जो कि व्यवस्थाओं को देखता है। कस्बे में हर कोई अपने दिन की शुरुआत कालिका माता के दर्शन से करना चाहता है, बाहर रहने वाले प्रवासी भी विभिन्न माध्यम से माता के दर्शनों के बाद ही अपनी दिनचर्या शुरू करते हैं।


नवरात्र में होते हैं विशेष आयोजन
कस्बे के कालिका देवी मंदिर में नवरात्र में विशेष आयोजन होते हैं। मंदिर में सुबह व शाम को महाआरती का आयोजन होता है तथा नौ दिन तक ढोल नगाड़ों के साथ प्रभात फेरी निकाली जाती है। वही नवरात्र में देवी भागवत कथा का आयोजन होता है। सप्तमी पर भगवती जागरण, दुर्गा अष्टमी को कन्याओं का पूजन व नवमी को शोभायात्रा निकाली जात है। नौ दिन तक कस्बे में नवरात्र महोत्सव एवं मेला चलता है।

प्रवासी आते हैं कालू
गौरतलब है कि कालू के काफी लोग व्यवसाय के कारण बाहर महानगरों में रहते हैं, लेकिन नवरात्र शुरू होने से पहले ही कालू पहुंच जाते हैं तथा नौ दिन तक यहां रहकर देवी की पूजा अर्चना एवं उपासना करते हैं। वही नवरात्र के दौरान आसपास के गांवों एवं शहरों से भी श्रद्धालुओं का आना लगा रहता है।

बना रहता है भक्तिमय वातावरण
कस्बे में नौ दिन चलने वाले नवरात्र महोत्सव के दौरान प्रभात फेरी, देवी भागवत, महाआरती, जागरण, झांकियों, शोभायात्रा से कस्बे का वातावरण भक्तिमय बना रहता है।