नृसिंह चतुर्दशी- बच्चे व युवा हिरण्यकश्यप का स्वरुप करते है धारण नृसिंह-हिरण्यकश्यप लीला मंचन की दशको पुरानी परम्परा
बीकानेर. काले वस्त्र, हाथ में कोडा, डरावना मुखौटा, मुखौटे पर दो सिंग और भयभीत करने वाली आवाज की गूंज शहर में हर साल एक दिन रहती है। यह अवसर होता है नृसिंह चतुर्दशी का। सुबह से शाम तक हर गली-मौहल्ले में घूम-घूम कर हिरण्यकश्यप शहरवासियों को भयभीत करता है। इस दौरान गली-मौहल्ले हिरणा-किसना गोविन्दा प्रहलाद भजै के स्वरों से गूंजते रहते है। बच्चे व युवा हिरण्यकश्यप का स्वरुप धारण कर एक गली से दूसरी गली व मौहल्लों में पहुंचते रहते है। इनके पीछे बच्चों व युवाओं की टोलिया रहती है। इस दौरान हिरण्यकश्यप स्वरुप धारण किया बच्चा अथवा युवा अपने हाथ में लिए कोड़ो का वार भी करता रहता है। लोग हिरण्यकश्यप के कोड़ो की मार हंसते-हंसते सहन करते है। कोड़े को अपने मस्तिस्क पर आदर के साथ लगाकर नमन भी करते है।
कोडो की मार, सटाक की आवाज
कपड़े को बटकर कोडा तैयार किया जाता है। हिरण्यकश्यप अपने हाथ में इस कोडे को लेकर शहर में घूमता है। पाटों, चौकियों पर कोडो का वार करता है। इससे तेज गति से सटाक की आवाज निकलती है। बीच में आने वाले लोगों की पीठ पर भी कोडे का वार धीमी गति से करता है। हिरण्यकश्यप स्वरुप कोडे से लोगों को डराने का प्रयास करता है। कई कलाकारों ने वर्षो तक हिरण्यकश्यप का स्वरुप धारण अपनी कला-प्रतिभा को प्रदर्शित कर ख्याति अर्जित की है।
बच्चे भी धरते है स्वरुप
नृसिंह-हिरण्यकश्यप लीलाओं के मुख्य कलाकार शाम को नृसिंह और हिरण्यकश्यप का स्वरुप धारण करते है। दोपहर में छोटे बच्चे हिरण्यकश्यप का स्वरुप धारण करते है व गली-मौहल्लों में घूमते है। शाम को मुख्य कलाकार लीला का मंचन करते है। लीला मंचन के दौरान नृसिंह और हिरण्यकश्यप के बीच कई बार युद्ध होता है। आखिर सूर्यास्त के समय भगवान नृसिंह प्रतीकात्मक रुप से हिरण्यकश्यप का वध करते है। भगवान नृसिंह व भक्त प्रहलाद के जयकारों से लीला मंचन स्थल गूंज उठता है।
यहां भरते है मेले
नृसिंह चतुर्दशी के दिन शहर में डागा चौक, लालाणी व्यास चौक, लखोटिया चौक, दुजारी गली और नत्थूसर गेट के बाहर नृसिंह मंदिरों के आगे नृसिंह चतुर्दशी के मेले भरते है। नृसिंह-हिरण्यकश्यप लीलाओं के मंचन होते है। हजारो शहरवासी इस दौरान मौजूद रहते है। इससे पहले दिन में नृसिंह मंदिरों में अभिषेक, पूजन, श्रृंगार, महाआरती और प्रसाद वितरण के कार्यक्रम होते है।