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Narcotics Drugs: नशे के आगे नतमस्तक सरकार, नारकोटिक्स श्रेणी की आठ दवा पाबंदी से बाहर

अब औषधि विक्रेताओं को महज तीन ही दवाइयों की खरीद और बिक्री व स्टॉक का डेटा ऑनलाइन सरकारी पोर्टल पर देना होगा।

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Narcotics Drugs: नशे के आगे नतमस्तक सरकार, नारकोटिक्स श्रेणी की आठ दवा पाबंदी से बाहर

Narcotics Drugs: नशे के आगे नतमस्तक सरकार, नारकोटिक्स श्रेणी की आठ दवा पाबंदी से बाहर

बीकानेर. प्रदेश में मेडिकेटड नशे (गोली, कैप्सूल, सीरप और इंजेक्शन) के फैलते जाल को रोकने के लिए ऐसी दवाओं की बिक्री के ऑनलाइन रेकॉर्ड की सख्ती पर सरकार ने कदम पीछे खीच लिए हैं। एनआरएक्स (नारकोटिक्स साल्ट की दवा) श्रेणी की 11 दवाओं में से आठ की बिक्री में छूट दे दी है। अब औषधि विक्रेताओं को महज तीन ही दवाइयों की खरीद और बिक्री व स्टॉक का डेटा ऑनलाइन सरकारी पोर्टल पर देना होगा। शेष दवाओं का पहले की तरह दवा विक्रेताओं को रजिस्टर संधारित करना होगा।

मेडिकेटेड नशा की गिरफ्त में श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ के बाद बीकानेर जिला भी तेजी से आ रहा है। इसकी बानगी नशीली दवाओं की पकड़ी जाने वाली खेप दे रही है। बीकानेर में ढाई साल में ढाई लाख नशे में काम ली जाने वाली गोली-कैप्सूल पकड़े जा चुके हैं। श्रीगंगानगर जिले में तो सीमावर्ती क्षेत्रों तक में दस हजार से अधिक गोलियों की खेप आए दिन पकड़ में आती रहती है। इसके बावजूद प्रदेश के औषधि विभाग ने ऐसी दवाओं पर और सख्ती करने की बजाए दवा विक्रेताओं के दबाव में छूट देने का फैसला किया है।दिल्ली से आता है नशा, कुरियर और बसें वाहक

नशे में काम ली जाने वाली प्रतिबंधित श्रेणी की दवाइयों का सबसे बड़ा उत्पादक हिमाचल प्रदेश है। यहां फैक्टरियों में तैयार कर ऐसी दवाइयां दिल्ली भेजी जाती हैं। दिल्ली से नशा कारोबारी कुरियर, ट्रांसपोर्ट के माध्यम से अन्य दवाइयों या सामान के साथ छिपाकर प्रदेश में भेजते हैं। बीकानेर संभाग के श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ और बीकानेर जिले में नशीली दवाइयों की सबसे ज्यादा खपत है। गली-कूचों में कई मेडिकल शॉप तो ऐसी दवाइयां बेचने के लिए ही संचालित हो रहे हैं। सबसे ज्यादा ट्यूरिस्ट बसों में लगेज के नाम पर ऐसी दवाइयों काे एक से दूसरी जगह पहुंचाया जाता है।

पहले 11, अब सूची में तीनसरकार की ओर से 11 दवाओं की सूची तैयार की गई, जिसमें कोडिन, ट्रोमाडॉल, एल्प्राजॉलम, कॉलोनाजेपाम, डायजापाम, डाइफेनोक्यलेट, नाइट्रेजेपाम, इटिजॉलम, पेंटाजॉसिन, ब्रुफेनहाइन, क्लोराइडजेपोक्साइड दवाओं की खरीद व बिक्री को ऑनलाइन रिकॉर्ड दर्ज करने के लिए पाबंद किया गया था लेकिन दुकानदारों के विरोध के बाद अब केवल तीन दवाओं का ही ृऑनलाइन बिक्री व खरीद का रिकॉर्ड रखना होगा। ऐसा नहीं करने वाले दुकानदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की होगी।

यूं पलटी सरकारऔषधि नियंत्रण विभाग और स्वास्थ्य विभाग राजस्थान सरकार ने नशे पर अंकुश के लिए नारकोटिक्स साल्ट की 11 दवाओं की सूची तैयार कर इनकी सख्ती से निगरानी शुरू की थी। औषधि विक्रेता को दवा खरीद करने से लेकर उसकी एक-एक डोज की बिक्री का बैच नम्बर और मरीज व चिकित्सक की जानकारी सरकारी पोर्टल पर देनी है। राजस्थान कैमिस्ट एसोसिएशन का प्रतिनिधि मंडल चिकित्सा मंत्री से मिला और इस व्यवस्था को वापस लेने की मांग की। जिस पर सरकार बैकफुट पर आ गई और आठ दवाइयों को इस व्यवस्था से बाहर निकाल दिया।

नशे में दुरुपयोग रोकने के लिए डाटा एंट्री व्यवस्था

ट्रोमाडॉल, कोडीन व एल्प्राजोलम, यह दवाएं एनडीपीएस में आती हैं। इन दवाओं का नशे के रूप में दुरुपयोग होने की आंशका रहती है। सरकार ने इन तीन दवाओं की खरीद व बिक्री का पूरा डेटा एसएसओ आईडी से ऑनलाइन पोर्टल पर एंट्री करने की अनिवार्यता की है। शेष आठ की निगरानी पहले की तरह रहेगी। - सुभाष मुटरेजा, सहायक औषधि नियंत्रक बीकानेर

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