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बीकानेर के तूफान का अंदाज, हिसार से आई सपना का जलवा

NRCE -बीकानेर के तूफान का अंदाज, हिसार से आई सपना का जलवा

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National Research Centre on Equines bikaner 31st Foundation Day

बीकानेर के तूफान का अंदाज, हिसार से आई सपना का जलवा

बीकानेर. राष्ट्रीय अश्व अनुसन्धान केन्द्र (National Research Centre on Equines bikaner ) के 31 वें स्थापना दिवस पर रविवार को अश्वों का मूल्यांकन किया गया। असमें अश्वों की आयु, रंग, ऊंचाई, वजन, अलर्टनेस, साइज आदि को ध्यान में रखकर जांच हुई। केंद्र प्रभारी अधिकारी डॉ. एस सी मेहता ने बताया कि किसानों द्वारा किए गए अश्वों के मूल्यांकन में बीकानेर के तूफान नाम के घोड़े और हिसार से आई सपना नाम की घोड़ी को सर्वश्रेष्ठ घोषित किया गया। वहीं मिली नाम की बच्छेरी को सर्वश्रेष्ठ सर्वश्रेष्ठ रही। दूसरे स्थान पर घोड़े कमल एवं घोड़ी हवा रही। केन्द्र के अधिकारियों ने बताया कि सपना नाम की घोड़ी को हिसार से यहां केन्द्र में लाया गया है। सपना को पालने वाले इसको रोजाना सेंपु व तेल से मालिश करते है जिसकी चमक को देखकर किसानों ने खूब तारीफ की। वहीं केन्द्र के तूफान नाम के घोड़े को देखकर हर कोई हैरान था।

यह घोड़ा काफी अलर्ट व तेज दिखाई देता है। इसकी रफ्तार काफी तेज होने के कारण यह आसानी से लोगों के काबू में नहीं आता है। केंद्र के प्रभारी अधिकारी डॉ. एस सी मेहता ने बताया कि सामान्यतया वैज्ञानिक एवं अधिकारी जा कर किसानों के घोड़ों एवं अन्य पशुओं का मूल्यांकन कर पुरस्कार देते हैं, लेकिन इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में अश्व पालकों की तीन टीम बनाई गई। जिसका प्रतिनिधित्व विजय सिंह, दिलीप सिंह एवं राजेन्द्र सिंह ने किया।

इन तीनों की टीम ने एवं चौथे अश्व विशेषज्ञ जोरावर सिंह चौहान ने केंद्र के वयस्क अश्वों व बच्छेरों का मूल्यांकन किया। इस अवसर पर केंद्र की ओर से डॉ. इंद्र मोहन वर्मा, जोरावर सिंह चौहान एवं जितेन्द्र सोलंकी का सम्मान, उनकी विशिष्ठ सेवाओं एवं केंद्र को मिले सहयोग के लिए किया गया। अश्व प्रतियोगिता के किसान-निर्णायकों को भी सम्मानित किया गया।

शीघ्र शुरू होगा अश्व चिकित्सालय
प्रभारी अधिकारी ने अश्व पालकों की समस्याओं का निराकरण करते हुए बताया की केंद्र में शीघ्र ही एक अश्व चिकित्सालय शुरू होगा। इसके लिए आवश्यक स्वीकृति मिल चुकी है एवं भवन भी तैयार है तथा वहां पशु पालकों के घोड़ों को रखने की पर्याप्त व्यवस्था है।

केन्द्र के श्रमिकों को सौंपी जिम्मेदारी
डॉ. एससी मेहता ने बताया कि केंद्र में कार्य कर रहे श्रमिकों को एक एक घोडा, घोड़ी अथवा बच्छेरे को सौंपकर उनके लालन पालन एवं सार संभल का जिम्मा सौंपा। प्रथम एवं द्वितीय स्थान पर आए अश्वों के मालिक श्रीराम, इशाक अली एवं तुलसी राम एवं विशाल, आशुराम एवं आदुराम को पुरस्कार देकर सम्मानित भी किया गया।