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एक वृद्ध औरत को उसके ही पति ने बनाया बंदी, 11 दिन बाद मौत

परिजनों पर वृद्धा का इलाज नहीं कराने एवं बंधक बनाकर रखने का आरोप, सदर पुलिस कर रही है मामले की जांच

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Old woman

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अपनों से घर और परिवार होता है। जिनके अपने नहीं होते उनका भगवान होता है लेकिन, अमरी देवी के अपनों का अपनों के साथ भगवान भी रूठ गए लगते हैं। सत्तर वर्षीय इस वृद्धा को जिंदगी के अंतिम पड़ाव में जीवन के कड़वे अनुभवों से दो-चार होना पड़ा।

उसका अपनों ने भरोसा तोड़ा। बीमारी की हालत में इलाज नहीं करवाकर एक कमरे में बंद कर दिया। पुरानी गिन्नाणी बागवानों का मोहल्ले में रहने वाली अमरी देवी को किसी की गुहार पर पीबीएम अस्पताल में भर्ती कराया गया।

जहां 11 दिन तक जीवन के लिए संघर्ष कर आखिर सोमवार को उसने दम तोड़ दिया। अमरीदेवी की मौत की सूचना मिलने पर समाज के कई लोग अस्पताल पहुंचे। उन्होंने दोषी लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की।

अखिल राजस्थान महिला एवं बाल विकास संयुक्त कर्मचारी संघ (एकीकृत) की प्रदेश मुख्य संरक्षक राखी गहलोत, अधिवक्ता लीलाधर भाटी सहित अनेक लोगों ने मृतका का पोस्टमार्टम मेडिकल बोर्ड से कराने की गुहार लगाई।

इस पर जिला प्रशासन के निर्देशानुसार तीन चिकित्सकों के बोर्ड का गठन कर पोस्टमार्टम कराया गया। उसके बाद शव परिजनों के सुपुर्द कर दिया। शाम को गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार कर दिया गया।

यह है मामला

अमरीदेवी के दूसरे पति शीतल प्रकाश पर उसे मकान के कमरे में बंधक बनाकर रखने और बीमार होने पर सही उपचार नहीं कराने का आरोप है। जिससे शरीर पर जगह-जगह घाव हो गए। पीबीएम अस्पताल के मेडिसिन सहायक आचार्य डॉ. श्यामलाल पर अमरी देवी का गलत उपचार करने का आरोप भी है।

अमरी देवी की मेडिकल डायरी में गलत इन्द्राज कर मरणासन स्थिति में पहुंचा दिया गया। अखिल राजस्थान महिला एवं बाल विकास संयुक्त कर्मचारी संघ (एकीकृत) की प्रदेश मुख्य संरक्षक राखी गहलोत ने कोर्ट में परिवाद दिया। जिस पर गत 22 जून को न्यायालय के आदेश पर सदर पुलिस ने अमरीदेवी को घर से मुक्त कराकर पीबीएम अस्पताल में भर्ती कराया।

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