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‘वे लड़कियों से पूछते हैं कि…’: DMK नेता के विवादित बयान से मचा बवाल, सोशल मीडिया पर लोगों का फूटा गुस्सा

DMK leader Controversial statement: डीएमके सांसद दयानिधि मारन ने उत्तर भारतीय और तमिलनाडु की महिलाओं की तुलना करते हुए एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है।

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DMK MP Dayanidhi Maran

डीएमके सांसद दयानिधि मारन

DMK MP Dayanidhi Maran: तमिलनाडु की सत्ताधारी डीएमके के सांसद दयानिधि मारन ने एक कार्यक्रम में उत्तर भारत में महिलाओं की स्थिति पर विवादास्पद टिप्पणी की है, जिसने राजनीतिक और सोशल मीडिया पर तीखी बहस छेड़ दी है। मारन ने चेन्नई के क्वैद-ए-मिल्लथ गवर्नमेंट कॉलेज फॉर विमेन में छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि उत्तर भारतीय राज्यों में लड़कियों को नौकरी करने से रोका जाता है और घरेलू कामों तक सीमित रखा जाता है, जबकि तमिलनाडु में लड़कियों को पढ़ाई और सशक्तिकरण पर जोर दिया जाता है।

उत्तर भारतीयों के खिलाफ शर्मनाक टिप्पणी

यह टिप्पणी 'उलगम उंगल कैयिल' (दुनिया आपके हाथ में) योजना के तहत आयोजित कार्यक्रम में आई, जहां तमिलनाडु के उप-मुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन ने 900 फाइनल ईयर छात्राओं को लैपटॉप वितरित किए। मारन ने कहा, 'हमारी छात्राएं गर्व महसूस करें। उत्तर भारतीय राज्यों में लड़की बच्चों से कहते हैं कि नौकरी मत करो, घर में रहो और घरेलू काम करो, लेकिन यहां हम चाहते हैं कि हमारी लड़कियां पढ़ाई करें।' उन्होंने डीएमके सरकार और मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की सराहना की, तमिलनाडु को 'भारत का सबसे अच्छा राज्य' बताते हुए। उन्होंने सामाजिक सुधारक पेरियार का जिक्र करते हुए कहा कि द्रविड़ आंदोलन ने लड़कियों की शिक्षा की नींव रखी और वर्तमान सरकार उसी सिद्धांत पर चल रही है।

सोशल मीडिया पर फूटा लोगों का गुस्सा

मारन की यह टिप्पणी उत्तर भारत के राज्यों पर व्यापक सामान्यीकरण के रूप में देखी जा रही है, जिसने क्षेत्रीय स्टीरियोटाइपिंग का आरोप लगाया है। सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है, जहां कई यूजर्स ने महिलाओं की शिक्षा की वास्तविकता पर सवाल उठाए हैं। बीजेपी ने इस बयान को 'दुर्भाग्यपूर्ण' बताया और कहा कि यह क्षेत्रीय विभेद को बढ़ावा देता है। राजनीतिक हलकों में यह बहस चल रही है कि भारत भर में महिलाओं की शिक्षा और सशक्तिकरण की स्थिति अलग-अलग है, लेकिन ऐसे बयान एकता को प्रभावित करते हैं।

छात्राओं को बांटा लैपटॉप

उधर, उदयनिधि स्टालिन ने कार्यक्रम में शिक्षा की भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “मुझे खुशी है कि आप सभी को लैपटॉप वितरित कर रहा हूं। अक्सर कहा जाता है कि लड़कियां शिक्षा पूरी करने के बाद समाज में बड़ा योगदान देती हैं। हम अपनी छात्राओं पर गर्व करते हैं।”

सीएम स्टालिन की जमकर की तारीफ

स्टालिन ने कॉलेज की इतिहास का जिक्र किया, जहां पूर्व मुख्यमंत्री एम करुणानिधि ने 1974 में नामकरण किया और इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत किया। राज्य सरकार ने इस पहल के लिए 2.5 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। इस साल 10 लाख छात्रों को लैपटॉप मिलने की उम्मीद है। पहले स्कूलों में लैपटॉप दिए जाते थे, लेकिन 2019 में योजना बंद हो गई थी। अब मुख्यमंत्री ने इसे कॉलेज छात्रों तक विस्तारित किया है, तकनीक और क्वालिटी से समझौता किए बिना।

एंटरटेनमेंट नहीं पढ़ाई के लिए यूज करें लैपटॉप

स्टालिन ने छात्राओं से अपील की कि वे लैपटॉप का उपयोग पढ़ाई के लिए करें, न कि एंटरटेनमेंट या सोशल मीडिया के लिए। पेरियार का हवाला देते हुए कहा, पेरियार ने कहा था कि लड़कियों से बर्तन छीनो और किताबें दो। आज हमारे मुख्यमंत्री न सिर्फ लैपटॉप दे रहे हैं, बल्कि शिक्षा पर जोर दे रहे हैं। मेरा शुभकामना है कि आप अपने क्षेत्रों में पुरुषों से भी ज्यादा सफल हों।