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कैंटीन से सामान लेने वाले बंदियों के खाते में रुपए ऑनलाइन जमा

बीकानेर केन्द्रीय कारागार :- बंदियों के परिजनों को होने वाली परेशानी से मिली निजात

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कैंटीन से सामान लेने वाले बंदियों के खाते में रुपए ऑनलाइन जमा

कैंटीन से सामान लेने वाले बंदियों के खाते में रुपए ऑनलाइन जमा

बीकानेर। लॉकडाउन में देश-प्रदेश पूरा लॉक है। सैकड़ों मुसिबतें बढ़ गई है वहीं कई सहूलियतें भी दी है। बीकानेर जेल में बंद बंदियों व उनके परिजनों को लॉकडाउन ने राहत दी है। जेल की कैंटीन से बंदियों को सामान लेने के लिए कई दिनों तक परिजनों के आने का इंतजार नहीं करना पड़ रहा है। अब परिजन घर बैठे ही बंदियों के खाते में ऑनलाइन जमा करवा सकेंगे।

९३ बंदियों के खाते में ७० हजार रुपए
बीकानेर केन्द्रीय कारागार में लॉकडाउन के बाद से बंदियों के खाते में ऑनलाइन रुपए जमा कराने की सुविधा दी गई। परिजन अब घर बैठे बंदियों खाते में रुपए डाल रहे हैं। अब तक ९३ बंदियों के खाते में ७० हजार रुपए जमा हो चुके हैं। इन रुपयों से बंदी जेल की कैंटीन से सामान खरीद सकते हैं।

सेंट्रलाइज सिस्टम लागू
जेल में सेंट्रलाइज सिस्टल लागू हैं। बंदियों के परिजन सेंट्रलाइज सिस्टम के खाते में रुपए जमा करवा देते हैं। यह रुपए बंदी के खाता नबंर से जमा होते हैं। रुपए जमा होने के बाद केन्द्रीय कारागार में बनी सेल में बंदी के नाम से मैसेज आ जाता है कितने रुपए जमा हो जाते हैं। रुपए जमा होने पर बंदी को सूचित कर दिया जाता है।


२५०० रुपए की लिमिट
जेल प्रशासन के मुताबिक हरेक बंदी के खाते में रुपए जमा कराने की लिमिट तय है। परिजन एक महीने में बंदी के खाते में अधिकतम २५०० रुपए जमा करवा सकते हैं। इन रुपयों को बंदी अपनी जरूरत के हिसाब से खर्च कर सकते हैं।

कैंटीन से खरीद सकते हैं यह सामान
दूध, दही, छाछ, बिस्किट, तेल, घी, नमकीन, कंघी, साबून, चीनी, गुड़, फल-फू्रट, अंडरवीयर, बनियान, चप्पल सहित दैनिक उपयोग की अधिकांश चीजें कैंटीन में उपलब्ध है।

जेल में बंदी
जेल में सजायाफ्ता ५०७
विचाराधीन बंदी ६९७

लॉकडाउन में दी गई सुविधा
लॉकडाउन के कारण परिजन आ नहीं सकते हैं। इसलिए बीकानेर केन्द्रीय कारागार में सेंट्रलाइज अकाउंट सिस्टम लागू किया गया है। इस अकाउंट में बंदियों के परिजन रुपए जमा करवाते हैं तो वह संबंधित बंदी के खाते में चले जाते हैं। खाते रुपए जमा होने की सूचना बंदियों को दी जाती है। इसके बाद बंदी पॉश मशीन में अंगूठा लगाकर सामान खरीद सकते हैं। अब तक ९३ बंदियों के ७० हजार रुपए जमा हो चुके हैं।
परमजीतसिंह सिद्धू, जेल अधीक्षक