
श्याम सुंदर स्वामी (फोटो: पत्रिका)
Paralympian Shyam Sundar Swami: एक ओर केंद्र और राज्य सरकार खिलाडिय़ों के हित में नित नई घोषणाएं कर रही है और खासतौर पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक विजेता को अच्छी नौकरी और बड़ा अनुदान दिया जा रहा है वहीं दूसरी ओर राजस्थान के अंतरराष्ट्रीय पैरा आर्चर को बिना कोई लिखित सूचना के सरकार ने नौकरी से निकाल दिया गया। उसका परिवार आर्थिक संकट में है।
वह दर-दर भटक रहा है ऐसे में क्या वह देश को पदक दिला पाएगा। कोई भी खिलाड़ी जब खेलना शुरू करता है तो दो लक्ष्य होते हैं पहला राज्य और देश का नाम रोशन करना और दूसरा अपने परिवार को आर्थिक मदद करना। अगर परिवार परेशानी में हो तो कोई भी खिलाड़ी मन लगाकर खेल नहीं सकता।
ऐसा ही कुछ हो रहा है दो बार के पैरालंपियन और विश्व विजेता पैरा आर्चर राजस्थान के पैरा आर्चर बीकानेर निवासी श्याम सुंदर स्वामी के साथ। स्वामी को मार्च में एशिया कप में भारत का प्रतिनिधित्व करना है और देश को उनसे स्वर्ण की आस है।
श्याम सुंदर के अनुसार मुझे "आउट ऑफ टर्न" नीति के तहत शारीरिक शिक्षक के पद पर नियुक्ति दी गई। नियुक्ति आदेश में यह शर्त रखी गई थी कि अभ्यर्थी को 5 वर्षों के भीतर आवश्यक प्रशिक्षण डिग्री प्राप्त करनी होगी। जबकि एक विकलांग खिलाड़ी यह ट्रेनिंग नहीं कर सकता। इसमें मेरा क्या दोष जबकि मैं लगातार देश के लिए पदक जीत रहा हूं।
अगर मैं ट्रेनिंग करूंगा तो मेरा अभ्यास छूट जाएगा। न तो मुझे कोई छूट दी और न ही कोई लिखित आदेश। एक दिव्यांग खिलाड़ी के लिए शारीरिक शिक्षक प्रशिक्षण की अनिवार्य शारीरिक प्रक्रियाओं को पूर्ण करना व्यावहारिक रूप से अत्यंत कठिन है। अचानक एक दिन जिला शिक्षा अधिकारी, माध्यमिक शिक्षा, बीकानेर ने उनकी सेवा समाप्ति की कार्रवाई प्रारंभ कर दी गई।
जब मैंने जिला शिक्षा अधिकारी को कहा कि मुझे लिखित में कुछ दिया जाए ऐसी स्थिति में जिला शिक्षा अधिकारी ने लिखित में देने से भी इनकार कर दिया और विद्यालय में आने से मना कर दिया।
अंतरराष्ट्रीय तीरंदाज स्वामी के अनुसार मुझे पिछले 5 माह से वेतन नहीं मिल रहा है। मुझे पिछले 5 माह से वेतन भी प्राप्त नहीं हो रहा है। आर्थिक स्थिति इतनी गंभीर है कि उनके पिता आज भी सब्जी का ठेला लगाकर परिवार का भरण-पोषण करते हैं।
तीरंदाजी जैसा महंगा खेल, अंतरराष्ट्रीय स्तर की तैयारी, उपकरणों का खर्च—इन सबके बीच एक खिलाड़ी को सेवा से निकाल देने का सरकारी निर्णय समझ से परे है। जहां एक खिलाड़ी पूरे तैयारी के साथ देश को पदक दिलाने का प्रयास कर रहा वहीं दूसरी ओर राज्य सरकार ने उससे रोजी-रोटी का सहारा ही छीन लिया। वह खिलाड़ी खेल छोड़ पिछले दो माह से दर-दर भटक रह है पर कोई सुनने वाला नहीं।
2016, 2017, 2018 - पैरा नेशनल आर्चरी चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक
2017 - पैरा वल्र्ड चैंपियनशिप, बीजिंग (चीन) - 5वां स्थान
2019 - पैरा एशियन चैंपियनशिप, थाईलैंड - मिक्स टीम सिल्वर
2021 - टोक्यो पैरा ओलंपिक में सहभागिता
2022 - पर वल्र्ड चैंपियनशिप दुबई सिल्वर मेडल मिक्स टीम
2024 - पेरिस पैरा ओलंपिक में सहभागिता
2023 - पैरा वल्र्ड चैंपियनशिप (चेक गणराज्य) - टीम इवेंट गोल्ड
2023 - ओलंपिक क्वालिफिकेशन इवेंट - सिल्वर मेडल व क्वालिफाई
2025 - पैरा एशिया कप, बैंकॉक - व्यक्तिगत गोल्ड, मिक्स टीम गोल्ड
16 मार्च 2026 से बैंकोक में एशिया कप का आयोजन होना है जिसके लिए भी मेरा भारतीय टीम में चयन हो गया है वर्तमान में मैं उसकी तैयारी कर रहा हूं और फिर एशियाई गेम्स के लिए भी तैयारी चल रही है। नौकरी छिन जाने से मैं अंदर से पूरी तरह से टूट गया हूं। मैं अभी भी एशियन गेम्स और आगामी एशिया कप की तैयारी कर रहा हूं, लेकिन आर्थिक संकट बहुत गहरा है। पिछले पांच माह से मुझे वेतन भी नहीं मिला है। सब जगह चक्कर लगा रहा हूं पर कोई सहायता नहीं मिली। हां, खेल सचिव सर ने आश्वासन दिया है।
वल्र्ड चैंपियनशिप पदक के आधार पर ‘ए ग्रेड’ नौकरी के लिए भी आवेदन किया हुआ है, किंतु अभी तक उस पर भी कोई निर्णय नहीं हुआ है।
अंतरराष्ट्रीय पैरा आर्चर श्याम सुंदर स्वामी का मुद्दा जल्द ही सुलझ जाएगा। वह मेरे पास आए थे। वह बहुत ही प्रतिभाशाली आर्चर हैं। मैंने उनसे कहा कि सरकार जल्द से जल्द उनकी समस्या का समाधान कर देगी।
-डॉ. नीरज के. पवन, अध्यक्ष, राजस्थान राज्य क्रीड़ा परिषद
Updated on:
17 Feb 2026, 2:55 PM IST
Published on:
17 Feb 2026, 2:52 PM IST
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