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जनता की जीत… गोचर भूमि अब गोचर ही रहेगी

- बीकानेर की 5 हजार 418 हेक्टेयर गोचर भूमि पर अब बीडीए और जिला कलक्टर का कोई अधिकार नहीं रहेगा। पत्रिका की गोचर बचाओ मुहिम और जनता के आंदोलन ने प्रशासन और सरकार को गोचर अ​धिग्रहण निरस्त करने के लिए मजबूर किया।

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बीकानेर. पांच महीने के लम्बे संघर्ष के बाद आखिर बीकानेर की जनता की जीत हुई। राज्य सरकार के निर्देश पर बीकानेर से लगती 5 हजार 418 हेक्टेयर भूमि को बीकानेर विकास प्राधिकरण और जिला कलक्टर के अधिकार क्षेत्र से बाहर निकाल दिया गया है। अब गोचर भूमि गोचर ही रहेगी। इसे विशेष श्रेणी में संरक्षित किया जाएगा। राज्य सरकार के पास इसके भूमि संबंधी सभी अधिकार रहेंगे।

भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष बिहारीलाल बिश्नोई सहित जिले के भाजपा विधायकों ने शनिवार को सर्किट हाउस में पत्रकार वार्ता कर इसकी घोषणा की। बीकानेर विकास प्राधिकरण ने मास्टर प्लान 2043 में गोचर भूमि पर आई हजारों आपत्तियों को स्वीकार करते हुए, जनता की मंशा के अनुरूप गोचर भूमि को अन्य उपयोग के लिए किया प्रस्तावित वापस लेने का आदेश भी जारी कर दिए है। भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष बिश्नोई ने यह पत्र भी गोचर आंदोलन की अगुवाई कर रहे लोगों को सौंपा। इसके बाद 27 जनवरी को संत समाज और पर्यावरण प्रेमियों की ओर से कलक्ट्रेट महाघेराव के आंदोलन को स्थगित करने की घोषणा की गई।

राजस्थान पत्रिका की मुहिम रंग लाई

बीडीए ने मास्टर प्लान 2043 का मास्टर प्लान जारी किया, उसके अगले दिन ही 28 अगस्त 2025 के अंक में सबसे पहले राजस्थान पत्रिका ने ‘मास्टर प्लान: खतरे में गोचर भूमि, हरियाली की जगह गोदाम, सड़कें और कॉलोनियां’ शीर्षक से पहली रिपोर्ट प्रकाशित की। इसके बाद ‘ पीढि़यों से संरक्षित जैव विविधता उजाड़ने का मास्टर प्लान’ शीर्षक से रिपोर्ट प्रकाशित की।

जनता जुड़ती गई कारवां बनता गया

पत्रिका ने गोचर बचाने की मुहिम छेड़ी और जनता साथ जुड़ी। लगातार रिपोर्ट प्रकाशित करने से 19 सितम्बर को हजारों लोगों ने कलक्ट्रेट का घेराव कर गोचर को बीडीए के अधिकार क्षेत्र से बाहर निकालने की मांग की। पत्रिका ने ‘40 हजार बीघा गोचर सरकारी भूमि नहीं, भामाशाहों की गायों को समर्पित आस्था है’ रिपोर्ट प्रकाशित कर बताया कि यह गोचर सरकारी भूमि नहीं, दानदाताओं ने रियासतकाल में चांदी के सिक्के के बदले खरीद कर छोड़ी है। 7 अक्टूबर 2025 को बीकानेर की जनता ने गोचर अधिग्रहण के खिलाफ 35 हजार से ज्यादा आपत्तियां दर्ज कराई।

विधायक जनता के साथ खड़े हुए

पत्रिका मुहिम का असर रहा कि विधायक अंशुमान सिंह भाटी, विधायक जेठानंद व्यास, विधायक ताराचंद सारस्वत, विधायक सिदि्ध कुमारी और विधायक डॉ. विश्वनाथ मेघवाल ने गोचर अधिग्रहण का लिखित विरोध किया। जनता के आंदोलन में साधु-संत समाज भी जुड़ा। आखिर गोचर भूमि के अधिग्रहण को रद्द करना पड़ा है।

बीडीए के नाम दर्ज इंतकाल होगा रद्द, गौ अभ्यारण्य बनेगा

प्रेस वार्ता में भाजपा उपाध्यक्ष बिश्नोई के साथ विधायक सिदि्ध कुमारी, ताराचंद सारस्वत, जेठानंद व्यास, अंशुमान सिंह भाटी, शहर जिलाध्यक्ष सुमन छाजेड़, देहात जिलाध्यक्ष श्याम पंचारिया भी मौजूद रहे। गोचर आंदोलन की अगुवाई कर रहे शिव गहलोत, राष्ट्रीय संत सरजूदास महाराज ने भी अपनी बात रखी। बिश्नोई ने बताया कि इसी महीने के अंतिम सप्ताह में संत समाज और गोचर प्रेमियों के साथ मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा बैठक करेंगे। इसमें गोचर भूमि पर गौ अभ्यारण्य विकसित करने, पौधरोपण कराने और गायों के लिए व्यवस्था पर विचार किया जाएगा। साथ ही गोचर भूमि का बीडीए के नाम दर्ज किया गया इंतकाल रद्द किया जाएगा। यह भूमि गोचर के नाम दर्ज कर जमाबंदी में राज्य सरकार के खाता नम्बर 1 में विशेष रूप से संरक्षित की जाएगी।

आंदोलन समाप्त नहीं

जिला कलक्टर ने अक्टूबर में गोचर भूमि का रातों-रात म्यूटेशन बदला था। गोचर भूमि का बीकानेर विकास प्राधिकरण के नाम इंतकाल दर्ज किया गया। अभी केवल मास्टर प्लान में से इस भूमि को हटाकर विशेष परिधीय क्षेत्र में रखा है। ऐसे में 27 जनवरी का आंदोलन स्थगित किया गया है। यदि बदला गया म्यूटेशन रद्द कर भूमि गोचर के नाम पर नहीं चढ़ाई गई तो आंदोलन फिर से किया जाएगा। अभी आंदोलन समाप्त नहीं हुआ है।- डॉ. बीडी कल्ला, वरिष्ठ कांग्रेसी

संघर्ष की जीत, अब गौ अभ्यारण्य बने

गोचर-ओरण संरक्षण के मुद्दे पर जो 27 जनवरी को महापड़ाव प्रस्तावित था, वह अब स्थगित कर दिया गया है। भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष बिहारीलाल बिश्नोई एवं बीकानेर के पांचों विधायकों ने गोचर के मुद्दे को प्राथमिकता में रख कर सीएम तक हमारी आवाज पहुंचाई। अब गोचर अपने स्वरूप में रहेगी। इसमें हस्तक्षेप के लिए बीडीए एवं जिला प्रशासन अधिकृत नहीं रहेगा। यह संघर्ष की जीत है। हमारी लड़ाई कभी भी किसी भी राजनीतिक दल से नहीं थी। केवल गोचर को उजाडऩे की सोच के विरोधी है। अब गौ अभ्यारण बनाने के लिए प्रयास किए जाएंगे।-महामंडलेश्वर सरजूदास महाराज