सभी मूलभूत सुविधाएं फिर भी कच्ची बस्तियां, डी-नोटिफाइड हो तो मिले लाभ

प्रशासन शहरों के संग अभियान - मूलभूत सुविधाओं के बाद भी कई कच्ची बस्तियां नहीं हो रही डी-नोटिफाइड
आमजन परेशान, निगम-न्यास को हो रहा राजस्व का नुकसान

By: Vimal

Published: 23 Sep 2021, 06:02 PM IST

बीकानेर. शहर की दशकों पुरानी कच्ची बस्तियों में से अधिकतर बस्तियां अब विकसित क्षेत्र की श्रेणी में है। यहां सडक़, सीवरेज, पेयजल, बिजली सहित सभी आवश्यक मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हो चुकी है। मकान भी पक्के बन चुके हैं। कई बस्तियों में बहुमंजिला इमारते और व्यावसायिक क्षेत्र भी बन गए हैं लेकिन नगर निगम और नगर विकास न्यास की सूची में अब भी ये क्षेत्र कच्ची बस्तियां हंै।

इन बस्तियों के डिनोटिफाइड नहीं होने से न केवल निगम और न्यास को राजस्व का नुकसान हो रहा है बल्कि क्षेत्र में रहने वाले लोगों को भी कच्ची बस्ती के लिए प्रभावी नियमों से निजात नहीं मिल रही है। बताया जा रहा है कि शहर में स्थित कच्ची बस्तियों में से करीब 70 प्रतिशत कच्ची बस्तियांे में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हो चुकी है। कुछ बस्तियां अब भी एेसी है, जिनमें मूलभूत सुविधाओं की आवश्यकता है।

 

 

न्यास क्षेत्राधिकार की 13 व निगम की 30 कच्ची बस्तियां

नगर विकास न्यास के क्षेत्राधिकार में 13 कच्ची बस्तियां हैं जो बिना डिनोटिफाइड है। इनमें अमरसिंहपुरा मेघवालान, फतीपुरा मेघवालान, बंगला नगर, सर्वोदय बस्ती नरसिंह सागर तालाब रेलवे टैंक के पास, प्रताप बस्ती, नत्थूसर गेट के बाहर हरिजन बस्ती, भाटों का बास, हमालों की बारी के बाहर भादाणियों की बगेची के पास, शीतला गेट के बाहर छोटा रानीसर बास, मोहल्ला पंचमुखा हनुमान मंदिर के पास, औद्योगिक क्षेत्र रानीबाजार, गुजरों के कब्रिस्तान के पास गोगागेट और बान्द्रा बास है। जबकि नगर निगम क्षेत्राधिकार में 30 कच्ची बस्तियां है। निगम की कमला कॉलोनी व कुम्हारान का बास नई लाइन गंगाशहर गैर कच्ची बस्ती घोषित हो चुकी है।

 

 

डी -नोटिफाइड होने से मिलेगा लाभ

शहर की जिन कच्ची बस्तियों में सभी प्रकार की मूलभूत सुविधाएं हो चुकी है व पक्के मकान बन चुके हैं। उनका डी नोटिफाइड होना जरूरी है। न्यास व निगम के जानकारों का कहना है कि पूर्ण रूप से विकसित हो चुकी कच्ची बस्तियों के डी नोटिफाइड होने से इसका लाभ वहां रहने वाले लोगों को मिलेगा। साथ ही निगम व न्यास को भी राजस्व की प्राप्ति होगी। कच्ची बस्ती नियम के अनुसार वहां के लोगों को अहस्तांतरणीय पट्टे दिए जाते हैं। इनको बेचा नहीं जा सकता है, रहन पर नहीं रखा जा सकता है। बैंक ऋण भी नहीं मिलता है। डी नोटिफाइड होने से लोगों को लीज डीड का पट्टा जारी हो सकेगा। निगम व न्यास का राजस्व भी बढ़ेगा।

 

 

सडक़ें बनी, सीवर पहुंची, बन गए है पक्के मकान

निगम और न्यास के क्षेत्राधिकार में जो कच्ची बस्तियां है उनमें से ७० प्रतिशत से अधिक बस्तियों में पक्की सडक़ें बन चुकी है। बिजली और पानी पहुंच चुके है। पक्के मकान बन चुके है। सीवर लाइन का काम हो चुका है। सामुदायिक भवन भी कई बस्तियों में बन गए है। मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हो गई है। जबकि आज भी कुछ बस्तियों में मूलभूत सुविधाओं की कमी है। सडक़ें कच्ची है। पेयजल की दिक्कत है। मकान कच्चे हैं। सामुदायिक भवन भी नहीं है।

 

 

नई कच्ची बस्तियों पर निर्णय नहीं

एक तरफ जहां न्यास पूर्ण विकसित हो चुकी कच्ची बस्तियों को डी नोटिफाइड नहीं कर रहा है, वहीं दूसरी ओर करीब आठ साल से 11 नई कच्ची बस्तियों को सूची में शामिल करने की प्रक्रिया को पूर्ण नहीं कर पाया है। बताया जा रहा है कि प्रन्यास की 13 दिसम्बर 2013 को हुई बैठक में प्रस्ताव संख्या दो में लिए गए निर्णय के अनुसार 11 कच्ची बस्तियों के लिए विभिन्न क्षेत्रों को सूचीबद्ध किया गया था, इनको आज तक कच्ची बस्ती घोषित नहीं की गई है।

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