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अब माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक स्कूलों के संस्था प्रधानों को प्रशासनिक कार्यों के साथ-साथ छात्रों को पढ़ाना भी जरूरी होगा।
माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने साप्ताहिक कालांश व्यवस्था के जो दिशा निर्देश जारी किए है उनमें प्रधानाचार्यो व प्रधानाध्यापकों को भी कक्षाएं लेनी होगी। उन्हे सप्ताह में 12 कालांश विद्यार्थियों को पढ़ाना होगा।
विद्यालय टाइम टेबल में संस्था प्रधानों को 12 कालांशों का विवरण दर्ज करना होगा। हालांकि संस्था प्रधानों को विभाग ने शाला दर्पण व अन्य ऑनलाइन गतिविधियों में इतना व्यस्त कर दिया है कि उन्हें शिक्षकों के कालांशों का पर्यवेक्षण करने तक का समय नहीं मिलता।
इसके अलावा विभाग ने व्याख्याताओं को सप्ताह में 33 कालांश, वरिष्ठ अध्यापकों को 36, अध्यापक लेवल एक व दो को सप्ताह में 42 कालांश लेने अनिवार्य होंगे।
निर्धारित कालांशों से कम पीरियड होने पर व्याख्याताओं को 11 व 12वीं कक्षाओं के अलावा 9वीं व 10वीं के कालांश भी पढ़ाने होंगे। इसी तरह वरिष्ठ अध्यापकों व अध्यापकों को भी कक्षाओं को पढ़ाना होगा।
एक शिक्षक दो से अधिक विषय नहीं पढ़ाएगा
संस्था प्रधानों को एक शिक्षक से दो से अधिक विषयों का अध्यापन न कराने, विषय अध्यापकों को यथा संभव संबंधित विषयों का शिक्षण काराने, भाषा शिक्षक व प्रवृति प्रभारी को तीन तीन कालांश व परीक्षा प्रभारी को 12 कालांश का भार मानते हुए कालांश आवंटित करने के निर्देश भी दिए गए है।
Published on:
23 Aug 2016 10:07 am
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