सब्जियों में राजा की उपाधि प्राप्त आलू के भाव इन दिनों एकदम गिर जाने से यह पशु चारे के रूप में उपयोग लिया जाने लगा है।
लूणाराम वर्मा/महाजन. सब्जियों में राजा की उपाधि प्राप्त आलू के भाव इन दिनों एकदम गिर जाने से यह पशु चारे के रूप में उपयोग लिया जाने लगा है। पशुधन बाहुल्य वाले इस अंचल में इन दिनों पशुपालक तूड़ी व पशुआहार की जगह दुधारू व बाखड़े पशुओं को आलू खिला रहे है।
परन्तु जानकारी के अभाव में चारे व पशुआहार का यह विकल्प पशुओं के लिए जानलेवा साबित हो रहा है वहीं दूध की गुणवत्ता में भी कमी आने से डेयरी संचालक दूध लेने में आनाकानी करने लगे है। गौरतलब है कि क्षेत्र में इन दिनों आलू के दाम महज 50 पैसे से 80 पैसे प्रति किलो है। जबकि पशु चारा पांच रुपए प्रति किला व पशुआहार कम से कम 10 रुपये प्रति किलो है। आलू सस्ते होने से पशुपालक गोवंश को पशु चारे व पशु आहार की जगह इन दिनों आलू ही खिला रहे है।
गांवों में सस्ते भाव में बेच रहे हैं आलू
गोवंश पालन व दूध उत्पादन में अपनी पहचान रखने वाले क्षेत्र के रतनीसर, शेरपुरा, ढाणी छिल्लां, खोडां, सूरजपुरा, घेसूरा, रामबाग, बालादेसर, गुसाईणां आदि में इन दिनों पिकअप चालक घूम-घूमकर आलू बेच रहे है। चारे से सस्ते होने के कारण पशुपालक क्विंटलों में आलू खरीद रहे है।
यह हो रहा है नुकसान सस्ते के लालच में पशुपालक गायों को सुबह व सायं को आलू ही खिला रहे है। जिससे यह नुकसानदायक साबित हो रहा है। पशु चिकित्सकों की माने तो चारे व पशु आहार की एवज में आलू खिलाने से पशु के लिए यह जानलेवा साबित हो रहा है।
शारीरिक क्रियाओं पर प्रतिकूल असर
पशुपालन विभाग ने हाल ही रतनीसर व अन्य गांवों में सर्वे करके पशुओं को आलू खिलाने से मना किया है। विभागीय अधिकारी बताते है कि प्रतिदिन चारे की बजाय आलू खिलाने से पाचन क्रिया सहित अन्य शारीरिक क्रियाओं पर प्रतिकूल असर पड़ता है। जिससे पशु की मौत हो जाती है। दूध की गुणवत्ता में भी कमी आने लगी है।
घेसूरा के पशुपालक सुरजीत धतरवाल ने बताया कि आलू खिलाने से क्षेत्र में कई गायों की मौत हो चुकी है। डेयरियों ने भी घटाये दाम, दूध लेने में आनाकानी आलू के कारण दूध की गुणवत्ता में आई कमी के कारण दूध डेयरियों ने भी दाम घटा दिए है। साथ ही दूध लेने में भी आनाकानी की जाने लगी है। गांवों से दूध परिवहन करने वाले वाहन संचालक भी परेशान है। डेयरी संचालक दूध की गुणवत्ता में कमी बता रहे है।
पशुधन के लिए घातक
पशु चारे की जगह गायों को आलू खिलाने से पशुओं के लिए यह घातक सिद्ध हो रहा है। रतनीसर सहित अन्य गांवों में सर्वे करके पशुधन को आलू नहीं खिलाने के लिए पशुपालकों को सुमझाइस की है। अगर आलू खिलाने है तो प्रति पशु एक-डेढ़ किलो आलू उबालकर नमक आदि मिलाकर खिलाये जा सकते है।
डॉ. राजेन्द्र स्वामी, पशु चिकित्सा प्रभारी महाजन।
इन दिनों गांवों में पशुपालक दुधारू पशुधन को आलू खिला रहे है जो नुकसानदायक साबित हो रहा है। पशुओं में जहां बीमारी पनप रही है वहीं दूध की गुणवत्ता में भी कमी आने से डेयरी संचालक दूध लेने में आनाकानी करने लगे है। पशुपालकों को समय रहते सचेत हो जाना चाहिए।
राजूराम शर्मा, उपाध्यक्ष संकल्प संस्थान महाजन।