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राजस्थान के इस कस्बा क्षेत्र में खनिज का अथाह भंडार, फिर भी विकास में पिछड़ा, जानिए कारण

राजस्थान का बीकानेर जिला प्रदेश में जिप्सम उत्पादन के लिए जाना जाता है। सबसे अधिक जिप्सम बज्जू क्षेत्र से निकलता है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में ट्रकों के जरिए जिप्सम बाहरी फैक्ट्रियों तक पहुंचाया जाता है, लेकिन क्षेत्र में जिप्सम आधारित उद्योग स्थापित नहीं होने से स्थानीय युवाओं को रोजगार नहीं मिल पा रहा।

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बीकानेर

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Santosh Trivedi

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भागीरथ ज्याणी

May 18, 2026

Rajasthan mining area

Rajasthan mining area. Photo- AI

बीकानेर/बज्जू। राजस्थान के पाक सीमावर्ती जिले के उपखंड बज्जू-कोलायत क्षेत्र प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर होने के बावजूद आज भी औद्योगिक और कृषि विकास की मुख्यधारा से दूर है। क्षेत्र में जिप्सम, बजरी, मिट्टी और कंकड़ जैसे खनिजों के अथाह भंडार मौजूद हैं, लेकिन उद्योगों की कमी और आधारभूत सुविधाओं के अभाव में यहां का कच्चा माल सीधे बाहरी राज्यों की फैक्ट्रियों तक पहुंच जाता है। बाद में यही उत्पाद तैयार होकर क्षेत्र में महंगे दामों पर वापस बिकते हैं, जबकि स्थानीय लोगों को रोजगार और आर्थिक लाभ नहीं मिल पाता है।

बड़ा उत्पादन क्षेत्र, फिर भी रोजगार नहीं

बीकानेर जिला प्रदेश में जिप्सम उत्पादन के लिए जाना जाता है। यहां सबसे अधिक जिप्सम बज्जू क्षेत्र से निकलता है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में ट्रकों के जरिए जिप्सम बाहरी फैक्ट्रियों तक पहुंचाया जाता है, लेकिन क्षेत्र में जिप्सम आधारित उद्योग स्थापित नहीं होने से स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर नहीं मिल रहे। यदि यहां उद्योग स्थापित किए जाएं तो हजारों लोगों को सीधा रोजगार मिल सकता है।

बजरी का बड़ा केंद्र

श्रीकोलायत क्षेत्र में सैकड़ों खदानों से बजरी का खनन होता है, जो राजस्थान के कई जिलों तक पहुंचती है। इसके अलावा कोलायत की मिट्टी भी देशभर में प्रसिद्ध मानी जाती है। बज्जू और कोलायत क्षेत्र में कंकड़ और अन्य निर्माण सामग्री भी प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है, लेकिन क्षेत्र में कोई बड़ा औद्योगिक क्षेत्र विकसित नहीं हो पाया।

योजनाएं फाइलों में..

स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में रीको औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने को लेकर कभी गंभीर प्रयास नहीं हुए। पिछली सरकार के दौरान बज्जू में औद्योगिक क्षेत्र की घोषणा जरूर हुई थी, लेकिन आज तक योजना धरातल पर नहीं उतर सकी। उद्योग नहीं होने से निवेश और रोजगार दोनों प्रभावित हो रहे हैं। गजनेर में कछुवा चाल से औद्योगिक क्षेत्र का कार्य चल रहा है।

कृषि विभाग की निष्क्रियता भी बनी बड़ा कारण

खनिज संपदा के साथ-साथ क्षेत्र में कृषि के क्षेत्र में भी संभावनाएं मौजूद हैं, लेकिन पानी की कमी और कृषि विभाग की निष्क्रियता किसानों के लिए बड़ी परेशानी बनी है। स्थानीय किसानों का कहना है कि कृषि विभाग के अधिकारी और कर्मचारी क्षेत्र में बहुत कम नजर आते हैं। नवाचार, नई तकनीक और वैकल्पिक फसलों को लेकर किसानों को पर्याप्त मार्गदर्शन नहीं मिल पाता।

पलायन बना मजबूरी

रोजगार और कृषि दोनों क्षेत्रों में सीमित अवसर होने के कारण बड़ी संख्या में युवा अन्य शहरों और राज्यों की ओर पलायन कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि सरकार आधारभूत सुविधाएं विकसित करे, पानी की समस्या का समाधान करे और उद्योगों के साथ कृषि नवाचार को बढ़ावा दे तो बज्जू-कोलायत क्षेत्र आर्थिक रूप से मजबूत बन सकता है। जिप्सम को लेकर भी लोगों ने फैक्टरी लगाई, लेकिन अधिकतर बंद हो गई और कुछ चल रही वो भी बंद के कगार पर है।

इनका कहना है

पश्चिमी राजस्थान का बज्जू व कोलायत क्षेत्र औद्योगिक हब के रूप में विकसित हो सकता है। यदि शासन व प्रशासन सोच ले तो और निश्चित रूप से लाभदायक भी होगा।

- राजेन्द्र शर्मा, अध्यक्ष, व्यापार मंडल, बज्जू

बज्जू व कोलायत क्षेत्र में खनिजों का भंडार है। यहां मिट्टी, जिप्सम, बजरी, कंकड़ आदि उपलब्ध है। चाइना क्ले तो देश नहीं विदेश तक जाती है। यह क्षेत्र निश्चित रूप से संभावना वाला है।

- कैप्टन मोहनलाल गोदारा, प्रशासक, बज्जू