
शिक्षा विभाग की नई योजना (फाइल फोटो)
बृजमोहन आचार्य
Education Department New Plan : राजस्थान के सरकारी स्कूल के विद्यार्थियों को निजी स्कूलों के विद्यार्थियों के स्तर पर लाने के लिए शिक्षा विभाग एक नवाचार करने जा रहा है। इसके तहत कक्षा आठवीं तक के विद्यार्थियों के सीखने का स्तर बेहतर किया जाएगा, जिससे बोर्ड परीक्षाओं और बाद में प्रतियोगी परीक्षाओं में वह पिछड़े नहीं। शिक्षा विभाग ने शिक्षा सत्र 2024-25 के लिए अकादमिक योजना तैयार की है। इसके तहत विद्यार्थियों का सीखने का स्तर उनकी कक्षा के स्तर से किसी भी रूप में कम नहीं रहने दिया जाएगा। शिक्षा निदेशक आशीष मोदी ने इसके लिए आदेश जारी कर दिए हैं। इसके तहत सरकारी स्कूल में रोजाना सातवां पीरियड रिवीजन का रखा जाएगा। शिक्षकों को प्रत्येक शनिवार को सप्ताह भर में इस पीरियड में कराई पढ़ाई का आकलन भी करना होगा। इस ट्रैकिंग के आधार पर शिक्षक को सोमवार एवं मंगलवार को गणित एवं विज्ञान के वही टॉपिक फिर से पढ़ाने होंगे, जो विद्यार्थियों के दिमाग में नहीं बैठे हैं। इस पूरी कवायद के पीछे विद्यार्थी की पढ़ने की क्षमता को भी विकसित करना है।
1- कक्षा 3 से 5 के विद्यार्थियों के पठन-पाठन कौशल में सुधार करना। लेखन कौशल में अभिवृद्धि के साथ शब्दों के सही उच्चारण, वाक्य संरचना, वर्तनी एवं व्याकरण का ज्ञान।
2- कक्षा 6 से 8 के विद्यार्थियों में साहित्यिक एवं रचनात्मक कौशल का विकास। गणितीय दक्षता के लिए सरल गणितीय संक्रियाओं की समझ उत्पन्न करना।
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1- विद्यार्थियों को पढ़ने-लिखने एवं समझने में सक्षम बनाना। संख्याओं की पहचान और बुनियादी गणितीय संक्रियाओं में सत्र 2026-27 तक दक्ष बनाना।
2- विद्यार्थी कक्षा 3 में क्रमोन्नत होने से पहले पढ़ने, लिखने एवं संख्या ज्ञान में कक्षा स्तर की दक्षता में सक्षम हो जाए। गणित की प्रश्नावली और विज्ञान के सभी पाठों में फार्मूले समझ आ जाए।
शिक्षा निदेशालय के एसओ अरुण कुमार शर्मा ने बताया कि विशेष पीरियड को स्कूल में कार्यरत शिक्षकों में से ही एक शिक्षक लेगा। शिक्षा विभाग ने वर्कशीट भी जारी कर रखी है। नई व्यवस्था का उद्देश्य पढ़ाई में बच्चों की भागीदारी सुनिश्चित करना है। इसमें वर्कशीट भरी जाएगी। सप्ताह के अंतिम दिन शिक्षक मूल्यांकन करेगा कि बच्चे को कौन-कौन सा अध्याय या गणित का सवाल गहराई से समझ नहीं आया। फिर सोमवार और मंगलवार को उस विषय के पीरियड में शिक्षक उसे फिर से समझाएंगे।
1- सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता में सुधार करना।
2- लर्निंग लेवल को विद्यार्थी की कक्षा के स्तर अनुरूप लाना।
3- शिक्षण को आसान और आनंददायी और रुचिकर बनाना।
4- राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन में प्रदेश मॉडल राज्य बने।
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Updated on:
9 Aug 2024, 4:12 PM IST
Published on:
9 Aug 2024, 4:12 PM IST
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