
ऊंटनी के दूध से बना पनीर (फोटो-एआई)
बीकानेर। राजस्थान की पहचान रहे ऊंट अब सिर्फ रेगिस्तान की सवारी या दूध तक सीमित नहीं रहेंगे। प्रदेश में पहली बार ऊंटनी के दूध से पनीर तैयार कर एक बड़ा वैज्ञानिक नवाचार किया गया है। यह उपलब्धि राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केंद्र (एनआरसीसी) के वैज्ञानिकों ने हासिल की है। खास बात यह है कि यह पनीर न केवल पोषण और औषधीय गुणों से भरपूर बताया जा रहा है, बल्कि इसकी बाजार में मांग बढ़ने पर बड़े स्तर पर उत्पादन की भी तैयारी की जा सकती है।
अब तक ऊंटनी के दूध का उपयोग मुख्य रूप से औषधीय गुणों के कारण किया जाता रहा है। इससे कई स्वास्थ्यवर्धक उत्पाद भी बनाए जाते हैं, लेकिन पनीर तैयार करने का प्रयोग पहली बार सफल हुआ है। वैज्ञानिकों का दावा है कि यह उत्पाद स्वास्थ्य के लिहाज से काफी लाभकारी साबित हो सकता है और आने वाले समय में यह डेयरी क्षेत्र के लिए भी नया विकल्प बन सकता है।
दरअसल, ऊंटनी के दूध की रासायनिक संरचना अन्य पशुओं के दूध से काफी अलग होती है। यही कारण है कि केवल ऊंटनी के दूध से पनीर बनाना तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण माना जाता है। इसकी बाइंडिंग क्षमता कम होने के कारण पनीर का आकार और बनावट तैयार करने में दिक्कत आती है। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए वैज्ञानिकों ने ऊंटनी और गाय के दूध को मिश्रित कर नई तकनीक विकसित की।
एनआरसीसी के वैज्ञानिक डॉ. मितुल बुंबडिया और डॉ. राजेन्द्र कुमार ने प्रयोगशाला स्तर पर शोध करते हुए सिट्रिक अम्ल की सहायता से यह पनीर तैयार किया। पनीर निर्माण में 70 प्रतिशत ऊंटनी का दूध और 30 प्रतिशत गाय के दूध का उपयोग किया गया। गाय के दूध के मिश्रण से ऊंटनी के दूध की जमावट क्षमता मजबूत हुई, जिससे पनीर की गुणवत्ता, बनावट और स्वाद में सुधार देखने को मिला।
वैज्ञानिकों के अनुसार यह पनीर प्रोटीन और खनिज तत्वों से भरपूर है। इसमें ऊंटनी और गाय दोनों के दूध के पोषक तत्व मौजूद हैं। इसका स्वाद हल्का नमकीन है और इसे पांच से सात दिनों तक सुरक्षित रखा जा सकता है। यह रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में भी मददगार माना जा रहा है।
एनआरसीसी के निदेशक डॉ. अनिल कुमार पूनिया का कहना है कि ऊंट वास्तव में चलती-फिरती फार्मेसी है। ऊंटनी के दूध से ऐसे मूल्यवर्धित उत्पाद विकसित होने से लोगों को इसके औषधीय गुणों का लाभ मिलेगा। साथ ही यदि इस तकनीक का व्यावसायीकरण होता है, तो पशुपालकों की आय बढ़ाने और ऊंट पालन को नई दिशा देने में भी यह कदम अहम साबित हो सकता है।
Updated on:
18 May 2026 11:05 pm
Published on:
19 May 2026 06:05 am
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