
प्रियंका का जन्म बीकानेर में हुआ और वहीं उनकी शिक्षा भी पूरी हुई। एक बार, जब वह 8वीं कक्षा में पढ़ती थीं, एक उपखण्ड अधिकारी स्कूल में आए थे। नीली बत्ती वाली कार देखकर उन्होंने ठान लिया कि उन्हें अफसर बनना है। प्रियंका ने अपने पिता से उपखण्ड अधिकारी बनने की प्रक्रिया के बारे में पूछा और इसके बाद उन्होंने कड़ी मेहनत शुरू की।
इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद पूरे जुनून के साथ अफसर बनने में जुट गईं। उन्होंने खुद को सिविल सेवा की परीक्षा के लिए तैयार किया और सफलता प्राप्त की। प्रियंका का 2016 का बैच उन्हें जोधपुर में एसडीएम पद पर तैनात करने में सफल रहा। उनकी आकस्मिक मौत ने न केवल उनके परिवार को बल्कि समूचे समाज को गहरा सदमा पहुंचाया है। प्रियंका की कहानी यह दर्शाती है कि कैसे एक साधारण सी लड़की ने अपने सपनों को साकार करने के लिए संघर्ष किया। उनकी यादें हमेशा प्रेरणा का स्रोत रहेंगी और उनकी जिद्दी मेहनत ने कई लोगों को आगे बढ़ने की राह दिखाई है।
Updated on:
19 Sept 2024 02:26 pm
Published on:
19 Sept 2024 01:25 pm
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