
सड़क हादसे :- हेलमेट नहीं पहना, हेड इंजरी से गंवा बैठे जान
बीकानेर. हर साल सैकड़ों लोग सड़क हादसों में जान गंवा रहे हैं। जिले में तीन साल के सड़क हादसों पर गौर करें तो एक वर्ष में 450 से अधिक सड़क दुर्घटनाएं हो रही हैं, जिनमें औसतन 350 लोग जान गंवा रहे हैं। बावजूद इन हादसों में कमी लाने के लिए जिम्मेदार विभागों की ओर से धरातल पर काम नहीं किया जा रहा है।
इससे भी बड़ी विडम्बना है कि सड़क हादसों में भी बिना हेलमेट दुपहिया वाहन चलाने वाले सिर में गंभीर चोट लगने के शिकार हो रहे हैं। संभाग के सबसे बड़े पीबीएम अस्पताल के ट्रोमा सेंटर में हर माह सात से आठ हजार लोग पहुंचते हैं। जिनमें से सड़क हादसों के घायलों की संख्या 45 फीसदी होती है। इसमें भी दुपहिया वाहन से गिरकर या दुर्घटनाग्रस्त होकर आने वालों की संख्या 175 से 195 तक होती है। सिर में गंभीर चोट लगने से हर माह 13 से 15 लोग मौत के मुंह में समा रहे हैं।
प्रदेश में सड़क हादसे लगातार बढ़ रहे हैं। नेशनल क्राइम रेकार्ड ब्यूरो के ताजा आंकड़ें के मुताबिक भारत में हर घंटे में सड़क दुर्घटना में 18 लोगों की मौत हो रही है। पिछले साल साढ़े पांच लाख से ज्यादा सड़क दुर्घटनाएं हुई और करीब डेढ़ लाख लोग काल के गाव में समा गए। हर पांच मिनट एक सड़क दुर्घटना और हर चौथे मिनट में एक मौत हो रही है।
इन्होंने बढ़ाया सड़क हादसों का ग्राफ
जिला पुलिस की मानें तो पिछले चार-पांच साल में सड़क हादसों का ग्राफ तेजी से बढ़ा है। हादसे बढ़ने की मुख्य वजह नौसिखिया वाहन चालक, तेजगति से वाहन चलाना है। इतना ही नहीं 100 वाहन चालकों में से 78 प्रतिशत ही लाइसेंसधारी हैं। कुछ मामले ऐसे भी सामने आए है जो नाबालिग होते हुए भी लाइसेंस बनवा चुके हैं।
एक नजर इधर …
- दुपहिया वाहन - 3,17, 776
- कार-तिपहिया , 22, 963
- चालक - करीब साढे पांच साख
- हेलमेट प्रतिशत- 78
हेलमेट से सुरक्षा, जरूर पहनें
हेलमेट वाहन चालक की सुरक्षा के लिए है, जिसे दुपहिया चालक जरूर पहनें। यहां ट्रोमा सेंटर में हर माह 150 से अधिक सिर की चोट के मरीज पहुंचते हैं, जिनमे से 10-12 की मौत हो जाती है।
डॉ. कपिल पारीक, एसोसिएट प्रोफेसर न्यूरो विभाग. एसपी मेडिकल कॉलेज
Published on:
23 Apr 2023 08:53 am

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