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नन्दोत्सव मनाया, जयकारों से गूंजा पांडाल

ऋषिकेश में परमार्थ निकेतन के गंगा तट पर संत दुलाराम कुलरिया की स्मृति मेें चल रहे श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में नन्दोत्सव मनाया गया।

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bhagwat katha

भागवत कथा

नोखा. ऋषिकेश में परमार्थ निकेतन के गंगा तट पर संत दुलाराम कुलरिया की स्मृति मेें चल रहे श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में मंगलवार को नन्दोत्सव मनाया गया। सजीव झांकियों व भजनों की प्रस्तुतियों के साथ मनाए गए नन्दोत्सव के हर्षोल्लास से कार्यक्रम स्थल का पूरा गंगा तट कृष्णमय बना रहा।

भजनों की प्रस्तुतियों व भगवान कृष्ण के जयकारों से पांडाल व परमार्थ निकेतन के पास का गंगा तट गूंजता रहा। उत्सव के दौरान जब नंदबाबा बने पूनम कुलरिया बाल रूप कृष्ण को फूलों से सजी टोकरी में आसीन कराकर पांडाल में पहुंचे तो श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा करते हुए 'हाथी घोड़ा पालकी-जय कन्हैया लाल कीÓ के उद्घोष से पांडाल गूंजा दिया। हर कोई बाल स्वरूप कृष्ण के दर्शन को लालायित था।

बच्चे भी पीछे नहीं
कृष्ण जन्मोत्सव में कुलरिया परिवार का हर बाल-गोपाल कृष्ण-राधा के रूप में था। नरसी कुलरिया के पुत्र जगदीश कुलरिया कृष्ण रूप में बाल ग्वाल बने परिवार के दूसरे बच्चों के साथ कृष्ण लीला करते पांडाल पहुंचे। कृष्ण रूप में जीवंत जगदीश कुलरिया आकॢषत कर रहे थे।

भंवर कुलरिया के पौत्र जयंत, नरसी कुलरिया के छोटे पुत्र जनक कुलरिया, दोहित्र देव बुढड़़, पूनम कुलरिया के पुत्र अभिषेक के साथ रामरतन, आयुष, मनीष आदि भी कृष्ण रूप में पांडाल पहुंचे। इनके साथ दोहित्री भूमि बुढड़़, गौरी, वान्या, अनुष्का, श्रुति, बुलबुल सहित परिवार की अन्य बच्चियां राधा के रूप में जब पांडाल पहुंची तो नन्हें बच्चों की भावनाओं को देखकर श्रद्धालु हतप्रभ रह गए। कृष्ण जन्मोत्सव पर भंवर-नरसी-पूनम कुलरिया के साथ उगमाराम, देवकिसन, मघाराम, चिमाराम कुलरिया सहित सभी परिवारजनों ने भगवान की मंगल आरती की।

भक्ति सर्वोपरि
कथा व्यास सींथल पीठाधीश्वर क्षमाराम ने कृष्ण जन्म, बाल लीला, पूतना उद्धार, गोपियों की रास लीला आदि कथा प्रसंगों के माध्यम से मनुष्य जीवन में भगवान की भक्ति को सर्वोपरि बताया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण समस्त जगत के एकमात्र स्वामी हैं। उनके ऐश्वर्य, माधुर्य, वात्सल्य सभी अनन्त हैं।

आस्था व श्रद्धा अनुपम
कथा विश्राम से पूर्व परमार्थ निकेतन के अधिष्ठाता स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कथा व्यास सींथल पीठाधीश्वर की सरलता, पवित्रता, विद्वता को प्रणाम करते हुए कहा कि भारत में इनके जैसे संतों की वजह से ही आध्यात्मिकता जीवित है। कुछ पाखंडी बाबाओं का भारत नहीं है। भारत के असली रूप का दर्शन यहां गंगा तट पर हो रहा है। जहां इस कथा कार्यक्रम की अविरल धारा बह रही है।

परमार्थ निकेतन, स्वर्गाश्रम, गीता भवन के गंगा तट से लेकर आसपास के स्थानों पर जहां जिसे जगह मिली, श्रद्धालु प्रभु भावित होकर कथा का आनन्द ले रहे हैं। चिदानन्द ने कहा कि जब तक भारतीय संस्कृति, परम्पराएं, संस्कार और श्रद्धा जीवित रहेगी तब तक भारतीयता पर कोई आंच नहीं आ सकेगी। स्वामी चिदानन्द ने कथा आयोजक भंवर-नरसी-पूनम कुलरिया व परिजनों की धर्म निष्ठा व आस्था को अनुपम बताते हुए कहा कि कुलरिया परिवार देश में धर्म निष्ठा, त्याग, सद्संस्कारों, संतों का आदर व सनातन संस्कृति को बढ़ावा देने में योगदान करते रहें।