चौमासा गीत में ‘सावण में जल खूब लोर बरसावेला, सरवर सारा भर जासी’, ‘सावण में लोर घिर आवै, आभो अमरत बरसावै’, ‘सावण में देखो भारी लोर, छाय रया नभ में आंठू पोर, नीर बरसावै’, ‘सावण में पलछिन लोरा, जोरो सूं जल बरसासी, सरवर सब भर जासी’, ‘मास सुरंगो आयो, ताल तलैया भर जावै’, ‘सावण बरसै चंहु ओर जोर सूं गरजे लोर गगन में’ तथा ‘सावण सुरंगो बरसै लोरो पर लोर है, भर गई ताल तलैया नाचै सब मोर है’ आदि के माध्यम से बीकानेर में सावन के दौरान होने वाली बारिश तथा तालाब, तलाइयों के भरने का वर्णन गीत के माध्यम से किया गया है।