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सिपाही की मिलीभगत से एसबीआई बैंक को करोड़ों रुपए की चपत, गिरवी रखे सोने के वजन में फर्जीवाड़ा

बैंक मैनेजर ने आरोप लगाया कि ऋण स्वीकृति के समय सोने के जेवर का मूल्यांकन किया गया था। ऋणी व स्वर्ण मूल्यांक ने मिलीभगत कर बैंक को धोखा देने की नीयत से सोने के वजन को बढ़ाकर स्वर्ण मूल्यांकन प्रमाण-पत्र दे दिया।

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एसबीआई बैंक की हाउसिंग बोर्ड शाखा से सोने के गहने गिरवी रखकर लोन देने में करोड़ों रुपए का फर्जीवाड़ा होने का मामला सामने आया है। बैंक की शाखा के प्रबंधक सैयद जावेद शाह ने पुलिस के एक सिपाही समेत 28 जनों के खिलाफ जेएनवीसी थाने में मामला दर्ज कराया है। बैंक मैनेजर ने आरोप लगाया कि ऋण स्वीकृति के समय सोने के जेवर का मूल्यांकन किया गया था। ऋणी व स्वर्ण मूल्यांक ने मिलीभगत कर बैंक को धोखा देने की नीयत से सोने के वजन को बढ़ाकर स्वर्ण मूल्यांकन प्रमाण-पत्र दे दिया। वास्तविक शुद्ध वजन की तुलना में सोने के जेवर का अधिक शुद्ध वजन दिखाकर बैंक के साथ धोखा किया। यह धोखाधड़ी बैंक की द्वितीय वैल्यूएशन रिपोर्ट में पकड़ में आई। आरोपियों को बैंक ने गोल्ड गिरवी रखने पर करीब तीन करोड़ 30 लाख 77 हजार 974 रुपए का लोन दिया। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

जरूरतमंदों के नाम पर लिए लोन

आरोपी सिपाही पर नौकरी के साथ-साथ फाइनेंस का काम करने का आरोप है। उस पर जरूरतमंद लोगों को झांसे में लेकर उन्हें पैसे ब्याज पर देने और उनके सोने के जेवरों को बैंक में गिरवी रखकर उनके दस्तावेजों के आधार पर गोल्ड लोन स्वीकृत करवाने का आरोप है। आरोपी सिपाही संतोष राणा पर 1 जून 2024 को मुक्ताप्रसाद नगर सेक्टर आठ निवासी दीपू सोलंकी ने धोखाधड़ी का मामला दर्ज कराया गया था। इस मामले में भी सिपाही पर दस्तावेज का गलत उपयोग कर सोना बैंक में गिरवी रखवाकर लोन उठाने का आरोप लगा। इससे पहले बीछवाल थाने में भी एक धोखाधड़ी का मामला दर्ज है।

करेंगे सख्त कार्रवाई

सिपाही संतोष राणा पर धोखाधड़ी का आरोप लगाया गया है। मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। यदि दोषी पाया गया तो जरूर कार्रवाई की जाएगी। -कावेन्द्र सिंह सागर, पुलिस अधीक्षक