
सौलर प्लांट्स ने छीन लिया रेगिस्तानी जायका
-हरेन्द्र सिंह बगवाड़ा
रेगिस्तानी इलाकों में वैसे हरियाली देखने को नहीं मिलती। कीकर, खेजड़ी, रोहिड़ा और कैर की झाडियां जैसी मरूस्थलीय वनस्पतियां प्राकृतिक रूप से उगती हैं। उन्हें भी सोलर कम्पनियों ने उजाड़ डाला। नतीजन गांवों की रसोइयों से अब कैर, सांगरी, कुमठा, फोगला, खींप और काचर जैसी पारंम्परिक सब्जियों की महक तकरीबन गायब हो गई है। सौर ऊर्जा प्लांट्स की भेंट चढ़ी इन सब्जियों की किल्लत के कारण इनके भाव आसमान छूने लगे हैं। गरीब को पोषण देने वाली ये सब्जियां रेगिस्तान में बहुतायत से होती थी। परन्तु रेतीले धोरों के सोलर प्लांट्स, नहरों और सड़कों की जद में जमीनें आने से अब इनका प्राकृतिक रूप से पैदा होना बन्द सा हो गया है।
बीकानेर जिले के दो दर्जन गांवों की करीब चालीस हजार बीघा जमीन पर सोलर प्लांट्स लग चुके हैं। ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर से जुडने के बाद बीकानेर सोलर एनर्जी का हब बनता जा रहा है। कोलायत, गजनेर, जामसर और लूणकरणसर क्षेत्र के गांवों में बड़े पैमाने पर इन दिनों सोलर प्लांट्स का काम चल रहा है। बीकानेर में आज करीब आठ हजार मेगावाट सोलर एनर्जी का उत्पादन हो रहा है, जबकि आने वाले दिनों में 13 हजार 800 मेगावाट का पार कर लेगा। करीब 18 बड़ी कम्पनियों ने इलाके में अपने प्लांट लगाए हुए हैं। सोलर प्लांट्स, जहां भी लगते हैं उस इलाके में पेड़ नहीं होने चाहिए। क्योंकि पेड़ों की छाया सोलर पैनल्स पर पड़ कर ऊर्जा उत्पादन को बाधित कर देती है।
अनुमति बिना काट रहे खेजड़ी
राज्य सरकार के नियमानुसार यदि कोई खेजड़ी, रोहिडा अथवा अन्य कोई पेड़ काटना है तो इसके लिए तहसीलदार से अनुमति लेना जरूरी है। कम्पनियां इस झमेले में नहीं पड़ती। ये कम्पनियां जब जमीन अधिग्रहित करती है उसी समय पेड़ काट कर जमीन लेने की शर्त रख देती है। किसान पैसे के लालच में पेड़ काटकर जमीन कम्पनियों के सुपुर्द कर देते हैं। पिछले कई सालों से सोलर प्लांट्स ने लाखों बीघा जमीनों को पेड़ विहीन कर डाला और सरकार को कानों कान खबर नहीं हुई। रेतीले इलाकों में इन वनस्पतियों के नष्ट होने से बाजार में कैर, सांगरी, खींप, फोगला आदि गायब से हो गए हैं। सांगरी की कीमत आठ सौ से हजार रुपए प्रति किलो बोली जा रही है। इसी तरह से फोगला, कैर, कुमठा बाजारों में बेहद सीमित मात्रा में ही उपलब्ध हो रहा है।
ब्यौरा मंगवाते है
पेड़ काटने की अनुमति लेनी जरूरी है। यह तहसीलदार के स्तर पर जारी होती है। सोलर कम्पनियों की ओर से कितने पेड़ काटे गए हैं, इसका ब्यौरा निचले स्तर पर से लेकर ही कुछ बता सकता हूं।
भगवतीप्रसाद कलाल, जिला कलक्टर बीकानेर
Updated on:
07 Jun 2022 10:24 pm
Published on:
07 Jun 2022 10:24 pm
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