
अब राज्य अभिलेखागार बना विश्वस्तरीय, देख सकेंगे दुलर्भ दस्तावेज
बीकानेर.
प्रदेश के राज्य अभिलेखागार में विश्वस्तरीय म्यूजियम का निर्माण पूरा हो चुका है। इसमें दुलर्भ और प्रदेश की कला, संस्कृति, इतिहास और पुरातत्व से जुड़े दस्तावेज संरक्षित कर रखे हुए हैं। करीब ४.१२ करोड़ की लागत से तैयार हुए इस अभिलेख म्यूजियम का मुख्यमंत्री अशोक गहलोत 20 अगस्त को सुबह 11 बजे वर्चुअल उद्घाटन करेंगे। इसके बाद देश-विदेश के पर्यटक और आम लोग इस अभिलेख म्यूजियम को देख सकेंगे। उद्घाटन कार्यक्रम की अध्यक्षता कला, साहित्य, सस्कृति एवं पुरातत्व विभाग मंत्री डॉ. बीडी कल्ला करेंगे।
यह देखने को मिलेगा म्यूजियम में
अभिलेख म्यूजियम का उद्देश्य आजादी से पूर्व के विविध राजपूत रजवाड़ों के मूल दस्तावेजों तथा मुगलकालीन इतिहास स्रोतों के विविध स्वरूपों की मूल्यवान श्रृंखलाओं के अद्वितीय खजाने को सुरक्षित व संरक्षित रखना है। इसमें मुगलकालीन फरमान, निशान, मन्सूर, अर्जदास्त, ताम्रपत्र, रजत पत्र, सियाह हुजूर, अखबार, वकील रिपोट्र्स, तोजियों, बहियों, रूक्कों, परवानों और प्रदेश के स्वतंत्रता सेनानियों की संघर्ष यात्रा, प्रजामंडल तथा अन्य विविध रूपों में मूल्यवान जानकारियों से युक्त ऐतिहासिक मूल दस्तावेजों को प्रदर्शित करना है।
विश्व पटल पर दर्ज होगा प्रदेश का नाम
संग्रहालय के निर्माण से राजस्थान का नाम विश्व में शोध व पर्यटन मानचित्र पर दर्ज होगा। अभिलेख म्यूजियम में विभिन्न दीर्घाओं का निर्माण किया गया है। इनमें प्रमुख दीर्घा यह है-
- छत्रपति शिवाजी महाराज दीर्घा
- फरमान, दस्तावेज दीर्घा
- ताम्रपत्र दीर्घा, महाराणा प्रताप दीर्घा
- मरम्मत एवं पुनर्वास कक्ष
- इटली के विद्वान डॉ. एलपी टेस्सीटोरी की दीर्घा
- प्रदर्शनी कक्ष
- प्रदेश के स्वतंत्रता सेनानियों की सचित्र दीर्घा
दस्तावेज दीर्घा में शासकों का खजाना
मुगल काल के दौरान राजपूत शासकों और रईसों को लिखे फरमान, निशान, मंसूर, बही, तोजी, चौपनिया, वकील रिपोर्ट, अर्जदाश्त व एतिहासिक बहियां से लेकर अभिलेखीय दस्तावेजों के चयनित खजाने को प्रस्तुत विभिन्न प्रकार के मूल दस्तावेजों को प्रदर्शित किया गया है।
प्रमुख विशेषताएं
- मुगल सम्राटों के समय फारसी भाषा में शाही आदेश या संदेश जारी हुआ करते थे। यह आम तौर पर राज्य के मनसबदार, जागीरदार और जमींदारों को संबोधित करते थे। इनमें से अधिकांश फरमानों पर मोहर और तुगरा हैं। उनमें से कुछ सम्राट के दाहिने हथेली की छाप या उनकी स्वयं लिखित कुछ पंक्तियां भी है। सामान्य उपयोग में मुहर, भव्य मुहर, मुहर कलां थी। इनमें नूरजहां के निशानो में एक आर्क सील, महाआरती मोहर और सम्राट का नाम भी इस्तेमाल किया गया है। प्रदर्शन को कालक्रम के अनुसार प्रस्तुत किया गया है। जहां 1623 ई से लेकर 1762 ई तक के दस्तावेज दिखाए गए हैं।
- पुरंदर की संधि 1665 मुगल युग का एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है। जो मूल रूप से फारसी में लिखा गया था। बीकानेर में राज्य अभिलेखागार में संरक्षित यह दस्तावेज मुगल सम्राट शाहजहां और मराठा पेशवा शिवाजी महाराज के द्वारा हस्ताक्षरित 22 फीट लंबी संधि है। शिवाजी महाराज को पुरंदर में औरंगजेब की सेना ने फंसाया तो उन्हें जून 1665 में दक्षिणी क्षेत्र में मुगल सेना के सेनापति राजा जयसिंह के साथ एक संधि पर हस्ताक्षर करना पड़ा। इस संधि के तहत शिवाजी महाराज को मुगल सम्राट के तय किए गए नियमों व शर्तों का पालन और बीजापुर पर आक्रमण की योजना सम्मिलित है।
Updated on:
19 Aug 2020 12:47 am
Published on:
19 Aug 2020 05:20 am
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