
... एक ऐसा दुर्ग, जिसे जमीन का जेवर कहा जाता है, क्या है इसमें खासियत
बीकानेर. बीकानेर का नाम आते ही यहां के किले, हवेलियां, लोगों का खान-पान, सादगी भरा रहन सहन और सकारात्मक रहते हुए जीयो और जीने दो की तर्ज पर रहने की अदा इसे औरों से अलग तो बनाती ही है, लेकिन इसके अलावा यहां का स्थापत्य, शिल्प और ऐसा कुछ जो किसी ने न किया हो, वह कर गुजरने की ललक भी इसे न सिर्फ कई स्तरों पर अन्य पर्यटन स्थलों से अलहदा बनाती है, बल्कि इतिहास के पन्नों में नाम दर्ज करा जाती है। ऐसी ही ऐतिहासिक विरासत को संजोए है यहां का ऐतिहासिक जूनागढ़।
यह दुर्ग बाकानेर की समृद्ध विरासत की झलक भी दिखाता है। चार शताब्दी से अधिक प्राचीन बीकानेर के जूनागढ दुर्ग में समूचे शहर की झलक समाई है। जूनागढ़ का किला जितना प्राचीन है, उतनी ही स्थापत्य कला का बेजोड़ उदाहरण है। इसमें की गई नक्काशी और पत्थरों पर उकेरे गए चित्र, कलात्मक महल, देशी विदेशी पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र हैं।
पत्रिका बीकानेर संस्करण के स्थापना दिवस के मौके पर जूनागढ़ का पहली बार ऐसा विहंगम दृश्य इसकी प्रसिद्ध और एतिहासिक पहचान Òजमीन का जेवरÓ को सार्थक करता दिखता है। अन्य दुर्ग और किले जहां जमीन से ऊंचाई पर बने हैं, वहीं एक मात्र यह दुर्ग जमीन पर बना है। इसके चारों तरफ खाई है।
कब हुआ दुर्ग का निर्माण
एतिहासिक नजरिए और आइने से देखें, तो उल्लेख आता है कि इस दुर्ग का निर्माण सन् 1588-1594 के बीच हुआ था और इसे करवाया था महाराजा रायसिंह ने। दुर्ग की खासियत यह है कि यह 37 बुर्ज वाला जमीन पर बना दुर्ग है। इसके अलावा सबसे ज्यादा महल इस दुर्ग में हैं। एक और बात जो इसे दूसरों से अलग बनाती है, वह है कि इस पर कभी किसी विदेशी ने आक्रमण नहीं किया। राजस्थान में सबसे पहले लिफ्ट का प्रयोग भी इसी दुर्ग में किया गया।
Published on:
07 Aug 2022 05:55 pm
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