
मूंगफली से बीकानेर जिले की मंडियां अट चुकी है। किसान अपनी उपज का पूरा मूल्य नहीं मिलने से मायूस और आक्रोशित है। कहने को मूंगफली की सरकारी खरीद शुरू कर दी है। परन्तु खरीद प्रक्रिया की पेचीदगी पूर्ण प्रक्रिया के चलते किसान करीब एक हजार रुपए प्रति क्विंटल के नुकसान के साथ व्यापारियों को मूंगफली बेचने पर मजबूर है।
सरकारी खरीद के हालात यह है कि मंडी में रोजाना महज पन्द्रह सौ क्विंटल की तुलाई ही हो रही है। एेसे में बीकानेर जिले का मूंगफली उत्पादक किसान आक्रोशित है। बीकानेर संभाग मुख्यालय और श्रीडूंगरगढ, नोखा, खाजूवाला और लूणकरनसर आदि जगह पर किसानों ने आंदोलन की शुरुआत कर दी है।
मूंगफली का गणित:-
- अनुमानित उत्पादन : 1.25 करोड़ बोरी
- अंतिम बार सरकारी खरीद : वर्ष 2013-14
- समर्थन मूल्य प्रति क्विं. : 4250 + 200 रुपए
- बाजार भाव प्रति क्विंटल : 3400 से 3500 रुपए
समर्थन मूल्य खरीद प्रक्रिया की खामियां
- प्रति किसान से केवल 25 क्विंटल मूंगफली ही एक बार में खरीदी जाएगी। जबकि एक कुआं वाले किसान के खेत में औसत सवा सौ क्विंटल मूंगफली का उत्पादन हुआ है।
- अभी सरकारी खरीद में रोजाना 1000 से 1500 बोरी की तुलाई हो रही है। जो महज किसान को झांसा देने से ज्यादा नहीं है।
-बाजार मूल्य और सरकारी मूल्य में एक हजार रुपए प्रति क्विंटल का अंतर है। इसका फायदा प्रभावशाली किसान और व्यापारी फर्जी तरीके से माल बेचेंगे।
- खेत में मूंगफली का उत्पादन करने वाला किसान और जमीन का मालिक अलग-अलग है। एेसे में खेती करने वाले किसान को फायदा नहीं मिलेगा।
यह करने की जरूरत
- सरकार को एक बार में किसान से 25की बजाए कम से कम 50 क्विंटल मूंगफली खरीद करनी चाहिए।
- रोजाना कम से कम 20 से 25 हजार बोरी मूंगफली की तुलाई होनी चाहिए ताकि अधिकाधिक किसान सरकारी खरीद पर अपना माल बेच सकें।
- गिरदावरी पर संबंधित किसान की फोटो लगानी चाहिए और बाजार में माल लेकर आने वाले किसान के साथ उस फोटो का मिलान किया जाना चाहिए। इससे फर्जीवाड़ा पर अंकुश लगेगा।
- भूमि मालिक के साथ भूमि को ठेके या हिस्से पर लेकर खेती करने वाले खेतीहर किसान को भी अपने नाम से फसल बेचने का अधिकार मिलना चाहिए।
- किसान के पास भामाशाह कार्ड होने की अनिवार्यता को समाप्त करना चाहिए। इससे परेशानी बढ़ रही है।
Published on:
24 Oct 2017 11:33 am
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